मीशापुलिमाला में नीलकुरिंजी का दुर्लभ ऊंचाई वाला पुष्पन
केरल के मुन्नार क्षेत्र में स्थित मीशापुलिमाला की ढलानों पर नीलकुरिंजी के फूल खिल रहे हैं। यह पुष्पन रोडो मेंशन के पास लगभग 2,470 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया है। नीलकुरिंजी आम तौर पर 2,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर नहीं खिलती, इसलिए यहां का दृश्य इसके ऊंचाई वाले आवास और स्थानीय पुष्पन चक्र के लिहाज से खास है। फूलों का मौसम अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक रहने की संभावना है।
पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर नीली चादर
नीलकुरिंजी का वानस्पतिक नाम Strobilanthes kunthiana है। यह Strobilanthes वंश की झाड़ी है, जो दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट में पाई जाती है। इसके पौधे एक साथ बड़ी संख्या में फूल सकते हैं और पहाड़ी ढलानों पर दूर तक रंगीन पट्टी बना देते हैं। नीलकुरिंजी का खिलना केवल एक पौधे का मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि पहाड़ी पारिस्थितिकी का ध्यान खींचने वाला प्राकृतिक आयोजन है।
नीलगिरि पहाड़ियों का नाम भी नीलकुरिंजी के सामूहिक पुष्पन से जुड़ा है। फूलों के खिलने पर पहाड़ियों पर नीली आभा दिखाई देती है; इसी कारण ‘नीलगिरि’ का अर्थ ‘नीले पर्वत’ माना जाता है। मीशापुलिमाला मुन्नार क्षेत्र की ऊंची चोटियों में से एक है और इसके आसपास का इलाका पश्चिमी घाट की जैव विविधता का हिस्सा है।
हर आबादी का पुष्पन चक्र अलग
नीलकुरिंजी और Strobilanthes वंश की अन्य प्रजातियों में फूल आने का अंतराल अलग-अलग हो सकता है। मीशापुलिमाला और चोक्करामुडी की आबादियों में लगभग 12 वर्ष का चक्र देखा जाता है। इन स्थानों पर पिछला बड़ा पुष्पन 2014 में दर्ज किया गया था। इसके विपरीत, एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान में अगला नीलकुरिंजी मौसम 2030 में अपेक्षित है। इससे स्पष्ट होता है कि एक ही क्षेत्र में भी अलग-अलग आबादियों के पुष्पन का समय समान होना जरूरी नहीं है।
पर्यटन के साथ आगंतुकों की संख्या पर नियंत्रण
केरल वन विकास निगम (केएफडीसी) ने 26 अक्टूबर 2026 से पर्यटकों के लिए कुरिंजी ट्रेक शुरू किया है। मुन्नार से लगभग 30 किलोमीटर की यात्रा के लिए बहुउपयोगी वाहन उपलब्ध हैं। प्रति व्यक्ति 1,250 रुपये के शुल्क में नाश्ते का पैकेट और पीने का पानी शामिल है। केएफडीसी और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने ऑनलाइन बुकिंग के लिए कुरिंजी मोबाइल अनुप्रयोग भी शुरू किया है। संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में भीड़ सीमित रखने के लिए प्रतिदिन अधिकतम 750 आगंतुकों की सीमा तय की गई है। देविकुलम के उप-कलेक्टर वी.एम. आर्या ने 24 अक्टूबर को कुरिंजी मौसम का उद्घाटन किया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नीलकुरिंजी का वानस्पतिक नाम Strobilanthes kunthiana है।
- मीशापुलिमाला केरल के मुन्नार क्षेत्र में पश्चिमी घाट का हिस्सा है।
- नीलगिरि तहर पश्चिमी घाट में पाया जाने वाला संकटग्रस्त पर्वतीय खुरदार स्तनधारी है।
- एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान केरल के इडुक्की जिले में स्थित है।
नीलकुरिंजी का यह पुष्पन पश्चिमी घाट की अनूठी प्राकृतिक लय को सामने लाता है। तय आगंतुक सीमा और पहले से बुकिंग की व्यवस्था से इस दुर्लभ दृश्य को देखने के साथ संवेदनशील आवास पर दबाव घटाने का प्रयास किया गया है।