चक्रवात अर्नब से पहले ओडिशा में व्यापक तैयारी
चक्रवात अर्नब के 28 अक्टूबर 2026 के आसपास आंध्र प्रदेश–ओडिशा तट से टकराने और अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप लेने का अनुमान है। इसके मद्देनजर ओडिशा सरकार ने तटीय और संवेदनशील जिलों में राहत, बचाव और निकासी की तैयारियां तेज कर दी हैं।
ओड्राफ की 60 टीमें चरणबद्ध तैनाती में
राज्य में ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओड्राफ) की 60 टीमें तैनात करने की योजना है। इनमें से लगभग 20 टीमें 26 अक्टूबर तक मैदान में भेजी जा चुकी थीं। बाकी टीमों की तैनाती तीन चरणों में की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की छह से आठ टीमों और अग्निशमन सेवा की 225 टीमों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारी और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी तैयारियों के समन्वय में शामिल हैं। प्रशासन ने राज्यभर में राहत और आपातकालीन प्रतिक्रिया की व्यवस्थाओं पर निगरानी बढ़ाई है।
पांच जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने ओडिशा के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई है। गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों को विशेष सतर्कता में रखा गया है। इन जिलों के लिए 28 अक्टूबर को और ओडिशा के कुछ हिस्सों के लिए 29 अक्टूबर को रेड अलर्ट जारी है।
राज्य के सभी बंदरगाहों पर दूरस्थ चेतावनी संकेत संख्या 1 लगाया गया है। मछुआरों को 29 अक्टूबर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार तटीय इलाकों में मौसम की स्थिति बदल सकती है, इसलिए प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने को कहा है।
निकासी और स्थानीय नियंत्रण कक्ष सक्रिय
संवेदनशील क्षेत्रों में जिला स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। जिला, प्रखंड, तहसील और शहरी निकाय स्तर पर चौबीसों घंटे चलने वाले नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं। पांचों हाई अलर्ट जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज तथा आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का कार्यक्रम है।
कच्चे मकानों, फूस की झोपड़ियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। निकासी व्यवस्था में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों की जरूरतों को भी शामिल किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य तूफान के संभावित असर से पहले जोखिम वाले लोगों को सुरक्षित करना और आपात सेवाओं तक पहुंच बनाए रखना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 भारत में आपदा प्रबंधन के लिए वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
- राष्ट्रीय आपदा मोचन बल प्राकृतिक और मानव-जनित आपदाओं में विशेष प्रतिक्रिया के लिए गठित बल है।
- भारतीय मौसम विज्ञान विभाग उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है।
- गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरि ओडिशा के वे पांच जिले हैं जिन्हें इस चक्रवात के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया है।
चक्रवात की दिशा और तीव्रता के पूर्वानुमान बदल सकते हैं। ऐसे में समय पर चेतावनी, सुरक्षित निकासी और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन नुकसान कम करने में अहम होगा।