अरुणाचल की जैव विविधता में जुड़ीं ओफियोराइजा की दो नई प्रजातियां

अरुणाचल की जैव विविधता में जुड़ीं ओफियोराइजा की दो नई प्रजातियां

अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले के विजयनगर क्षेत्र में वनस्पति सर्वेक्षण के दौरान ओफियोराइजा वंश की दो नई प्रजातियों की पहचान की गई है। इनके वैज्ञानिक नाम Ophiorrhiza shidiensis और Ophiorrhiza pemae रखे गए हैं। इस शोध के निष्कर्ष 23 अक्टूबर 2026 को ऑनलाइन प्रकाशित हुए। दोनों प्रजातियां रुबिएसी कुल से संबंधित हैं।

पूर्वी हिमालय में खोज का महत्व

विजयनगर क्षेत्र पूर्वी हिमालयी राज्य अरुणाचल प्रदेश में स्थित है और भारत-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है। इस क्षेत्र में पौधों की विविधता का अध्ययन स्थानीय पारिस्थितिकी और वनस्पति संपदा को समझने में मदद करता है। नई प्रजातियों की पहचान से यह भी स्पष्ट होता है कि क्षेत्र के कुछ हिस्सों का व्यवस्थित वनस्पति सर्वेक्षण अभी कितना महत्वपूर्ण है।

ओफियोराइजा फूलदार पौधों का एक वंश है। यह रुबिएसी कुल में आता है, जिसे कॉफी, मैडर या बेडस्ट्रॉ कुल भी कहा जाता है। शोध दल में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के अरुणाचल प्रदेश क्षेत्रीय केंद्र, ईटानगर के कृष्णा चाउलू और विनय कुमार साहनी तथा चेन्नई स्थित मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग की रेंथलेई लालनुनफेली शामिल थे।

पौधों की पहचान में मददगार लक्षण

Ophiorrhiza shidiensis एक सीधा बढ़ने वाला बहुवर्षीय शाकीय पौधा है, जिसकी ऊंचाई एक मीटर तक हो सकती है। इसकी पत्तियों की निचली सतह हल्के हरे रंग की होती है। इसके नलीनुमा फूल आधार पर सफेद, बीच में हल्के गुलाबी और मुंह के पास गुलाबी-लाल रंग के होते हैं।

Ophiorrhiza pemae, Ophiorrhiza himadrica से निकट संबंध रखती है, लेकिन कुछ स्पष्ट लक्षणों से अलग पहचानी जाती है। यह अधिक ऊंची होती है और इसकी पत्तियां बड़ी तथा किनारों पर विशिष्ट बनावट वाली होती हैं। इसके फूल हल्के गुलाबी से बैंगनी रंग के होते हैं। पौधों के आकार, पत्तियों और फूलों के ये अंतर प्रजातियों की पहचान में सहायक हैं।

सर्वेक्षण और नामकरण की पृष्ठभूमि

शोधकर्ताओं ने इन पौधों के समूह पहली बार मार्च 2025 में देखे। अप्रैल 2026 में वे नमूने एकत्र करने और उनका विस्तृत अध्ययन करने के लिए दोबारा उन स्थानों पर गए। Ophiorrhiza shidiensis का नाम ‘शिदी’ पर रखा गया है, जो लिसु (योबिन) समुदाय द्वारा गांधिग्राम के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पारंपरिक नाम है। दूसरी प्रजाति Ophiorrhiza pemae का नाम अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के सम्मान में रखा गया। खांडू ने 25 अक्टूबर 2026 को शोध दल के प्रति आभार व्यक्त किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रुबिएसी कुल को कॉफी, मैडर या बेडस्ट्रॉ कुल के नाम से भी जाना जाता है।
  • भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण की स्थापना वर्ष 1890 में हुई थी।
  • वैज्ञानिक द्विनाम पद्धति में किसी प्रजाति के नाम में वंश का नाम और विशिष्ट उपनाम शामिल होता है।
  • भारत-बर्मा क्षेत्र को जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में मान्यता प्राप्त है।

चांगलांग जिले से मिली ये दोनों प्रजातियां अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध वनस्पति विविधता का नया प्रमाण हैं। इनके दर्ज होने से पूर्वी हिमालय में पौधों के सर्वेक्षण और संरक्षण का महत्व और रेखांकित होता है।

Originally written on October 26, 2026 and last modified on October 26, 2026.

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