महाराष्ट्र में वन्यजीव संरक्षण का दायरा बढ़ाने की पहल

महाराष्ट्र में वन्यजीव संरक्षण का दायरा बढ़ाने की पहल

महाराष्ट्र राज्य वन्यजीव मंडल ने 26 अक्टूबर 2026 को हुई अपनी 26वीं बैठक में दो वन क्षेत्रों को वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा देने और सात जिलों में 14 नए संरक्षण आरक्षित क्षेत्र स्थापित करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में वन्यजीव आवासों के संरक्षण के साथ संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन से जुड़े कई फैसले भी लिए गए।

कोलामारका और तानसा के विस्तार पर सहमति

मंडल ने गढ़चिरौली जिले के कोलामारका संरक्षण आरक्षित क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। यह क्षेत्र जंगली भैंसों की आबादी के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, मौजूदा तानसा वन्यजीव अभयारण्य से सटे क्षेत्र को शामिल कर अभयारण्य का विस्तार करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।

तानसा विस्तार में छह गांवों—ओगदा, खोड़े, तिरमल, पाचघर, फणसाड और अमले—की कुल 588.767 हेक्टेयर राजस्व तथा निजी भूमि शामिल है। इस विस्तार का घोषित उद्देश्य क्षेत्र को मानव बस्ती से मुक्त अभयारण्य के रूप में विकसित करना है। ये मंडल द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव हैं; इन्हें अंतिम रूप देने के लिए आगे की प्रक्रिया आवश्यक होगी।

सात जिलों में 14 संरक्षण आरक्षित क्षेत्र

संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के प्रस्ताव पुणे, रायगढ़, नासिक, नंदुरबार, ठाणे, पालघर और चंद्रपुर जिलों से जुड़े हैं। पुणे और रायगढ़ में फैला वेल्हे-मुलशी तथा पुणे का भोर-गिरिगड इनमें शामिल हैं। नासिक जिले में दिंडोरी, सुरगाणा और तह्राबाद, जबकि नंदुरबार में चिंचपाड़ा का प्रस्ताव है।

रायगढ़ में अलीबाग और घेरा मानिकगढ़ तथा पुणे-रायगढ़ क्षेत्र में लोणावला शामिल हैं। ठाणे जिले के गुमतारा और पालघर के जव्हार, अशेरिगढ़ तथा धामणी के साथ चंद्रपुर के एकरा के प्रस्ताव भी स्वीकृत हुए। इस तरह ये प्रस्ताव अलग-अलग जिलों के वन और प्राकृतिक क्षेत्रों को संरक्षण के दायरे में लाने की योजना का हिस्सा हैं।

आवास संरक्षण और प्रबंधन योजनाओं पर जोर

मंडल ने कोका वन्यजीव अभयारण्य के 100.139 वर्ग किलोमीटर और जयकवाड़ी पक्षी वन्यजीव अभयारण्य के 255.79 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को महत्त्वपूर्ण वन्यजीव आवास घोषित करने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। अभयारण्य क्षेत्रों में बांधों की मरम्मत, पुनर्वास और गाद निकालने जैसे नियमित कार्यों को प्रबंधन योजनाओं में शामिल करने का निर्देश दिया गया। इसके लिए आवश्यक संशोधन तीन महीने के भीतर करने को कहा गया है।

नियमित कार्यों के लिए लागू नियमों के अनुरूप मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने पर भी निर्देश दिए गए। बैठक में बाघ अभयारण्यों के मौन क्षेत्रों और बफर क्षेत्रों में गांवों के पुनर्वास से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हुई। संरक्षित क्षेत्रों, पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों और बाघ गलियारों में सड़क, स्वास्थ्य सुविधा तथा बिजली लाइन जैसी आधारभूत संरचनाओं के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीव संरक्षण का प्रमुख कानूनी आधार है।
  • संरक्षण आरक्षित क्षेत्र की श्रेणी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में 2002 के संशोधन के जरिए जोड़ी गई थी।
  • महत्त्वपूर्ण वन्यजीव आवास की परिभाषा वन अधिकार अधिनियम, 2006 में दी गई है।
  • महाराष्ट्र के नए संरक्षण आरक्षित क्षेत्र के प्रस्ताव सात जिलों में फैले हैं।

इन निर्णयों से महाराष्ट्र में वन्यजीव आवासों को औपचारिक संरक्षण देने और अभयारण्यों के प्रबंधन को व्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बनेगा।

Originally written on October 27, 2026 and last modified on October 27, 2026.

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