मार्स्क का भारत में पहला जहाज मरम्मत पड़ाव, समुद्री क्षेत्र को मिलेगा बल

मार्स्क का भारत में पहला जहाज मरम्मत पड़ाव, समुद्री क्षेत्र को मिलेगा बल

वैश्विक कंटेनर परिवहन कंपनी ए.पी. मोलर–मार्स्क अपने सिंगापुर के ध्वज वाले जहाज ‘मार्स्क चटगांव’ की पहली नियोजित ड्राईडॉकिंग भारत में कराने जा रही है। जहाज को अक्टूबर 2026 में चेन्नई के पास एलएंडटी के कत्तुपल्ली शिपयार्ड में मरम्मत और तकनीकी जांच के लिए लाया जाएगा। यह कदम भारत में जहाज मरम्मत सुविधाओं के उपयोग और घरेलू समुद्री उद्योग के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम है।

जहाज की जांच और मरम्मत की योजना

‘मार्स्क चटगांव’ के 20 अक्टूबर 2026 को कत्तुपल्ली पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, आगमन परिचालन संबंधी स्थिति और मौसम पर निर्भर करेगा। ड्राईडॉकिंग में जहाज को पानी से बाहर निकालकर उसके जलमग्न हिस्से और अन्य प्रणालियों की जांच, मरम्मत तथा रखरखाव किया जाता है। इससे जहाज के उस हिस्से तक पहुंचना संभव होता है जो सामान्य परिस्थितियों में पानी के भीतर रहता है।

इस बार के कार्य में एक निर्धारित विशेष सर्वेक्षण शामिल है। यह जहाज पर लागू तकनीकी और वर्गीकरण संबंधी मानकों के तहत की जाने वाली विस्तृत जांच होती है। इसके साथ जहाज के बाहरी ढांचे, संरचना, मशीनरी, उपकरणों और प्रणोदन प्रणालियों का रखरखाव तथा ओवरहॉल किया जाएगा। प्रणोदन प्रणाली जहाज को आगे बढ़ाने और दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भारत-मार्स्क सहयोग का पहला परिचालन कदम

यह ड्राईडॉकिंग एलएंडटी और मार्स्क के बीच सहयोग को जमीन पर उतारने वाला पहला प्रमुख परिचालन कदम है। दोनों कंपनियों ने इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के दौरान एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत जहाज निर्माण, जहाज मरम्मत और वैश्विक मानकों से जुड़े ज्ञान के आदान-प्रदान तथा क्षमता निर्माण में सहयोग का ढांचा बनाया गया है।

मार्स्क ने फरवरी 2025 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ भी समझौता ज्ञापन किया था। कंपनी भारत की अन्य संस्थाओं के साथ जहाजों की मरम्मत, रखरखाव और निर्माण के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही है। इस तरह कत्तुपल्ली में होने वाला काम किसी एक मरम्मत तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय शिपयार्डों के साथ व्यापक सहयोग की दिशा में एक व्यावहारिक पहल है।

कत्तुपल्ली शिपयार्ड की भूमिका

चेन्नई के निकट स्थित कत्तुपल्ली शिपयार्ड में जहाज को पानी से बाहर निकालने के लिए एलएंडटी की शिपलिफ्ट प्रणाली का इस्तेमाल होगा। इस प्रणाली में एक मंच जहाज को पानी से उठाकर मरम्मत क्षेत्र तक ले जाता है और काम पूरा होने पर उसे वापस पानी में उतारता है। इसे भारत की सबसे बड़ी शिपलिफ्ट प्रणाली बताया गया है। एलएंडटी के लिए यह परियोजना अपने शिपयार्ड और तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय जहाज संचालक के साथ उपयोग में लाने का अवसर भी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ड्राईडॉकिंग में जहाज को पानी से बाहर निकालकर उसके जलमग्न ढांचे की जांच और मरम्मत की जाती है।

  • शिपलिफ्ट मंच की सहायता से जहाज को पानी से उठाकर मरम्मत क्षेत्र तक पहुंचाती है।

  • एलएंडटी और मार्स्क के बीच समझौता ज्ञापन पर इंडिया मैरीटाइम वीक 2025 के दौरान हस्ताक्षर हुए थे।

  • मार्स्क ने फरवरी 2025 में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ भी समझौता ज्ञापन किया था।

‘मार्स्क चटगांव’ की प्रस्तावित ड्राईडॉकिंग भारत की जहाज मरम्मत क्षमता और वैश्विक समुद्री कंपनियों के साथ सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर है। इसकी वास्तविक समय-सारणी परिचालन और मौसम संबंधी परिस्थितियों के अनुसार तय होगी।

Originally written on October 20, 2026 and last modified on October 20, 2026.

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