महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक वेटलैंड्स का सत्यापन पूरा

महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक वेटलैंड्स का सत्यापन पूरा

महाराष्ट्र ने राज्य के अधिकांश वेटलैंड्स यानी आर्द्रभूमियों का भौतिक सत्यापन पूरा कर लिया है। 19-20 मई 2026 तक राज्य में चिन्हित 23,415 वेटलैंड्स में से 23,404 का ग्राउंड-ट्रुथिंग कार्य पूरा हो चुका है। शेष 11 वेटलैंड्स पुणे जिले में स्थित हैं। सत्यापित नक्शों को अब जिला प्रशासन और राज्य वेटलैंड प्राधिकरण को भेजा जाएगा, ताकि उन्हें वेटलैंड्स (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियमों के तहत अधिसूचित किया जा सके। यह प्रक्रिया पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत में वेटलैंड दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया

भारत में वेटलैंड्स की पहचान और दस्तावेजीकरण एक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसमें सैटेलाइट मैपिंग, फील्ड सर्वे और भौतिक सत्यापन शामिल होते हैं। इस प्रक्रिया के तहत झीलें, तालाब, दलदली क्षेत्र, मैंग्रोव और अन्य जल निकायों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर “नेशनल वेटलैंड्स इन्वेंटरी एंड असेसमेंट” कार्यक्रम के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वेटलैंड्स की पहचान और वर्गीकरण किया जाता है। इसका उद्देश्य जल संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है।

वेटलैंड्स को कानूनी संरक्षण

भारत में वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए “वेटलैंड्स (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम” लागू हैं। ये नियम आर्द्रभूमियों की अधिसूचना, संरक्षण और उपयोग को नियंत्रित करते हैं। राज्य वेटलैंड प्राधिकरण इस प्रक्रिया का प्रमुख निकाय होता है, जो संरक्षण उपायों के समन्वय और अधिसूचना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। किसी भी वेटलैंड को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने से पहले उसका औपचारिक अधिसूचना चरण पूरा करना आवश्यक होता है।

महाराष्ट्र में वेटलैंड्स का वितरण

महाराष्ट्र में विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में वेटलैंड्स मौजूद हैं। राज्य के दस्तावेजीकरण अभ्यास के अनुसार अहमदनगर जिले में सबसे अधिक 1,596 वेटलैंड्स दर्ज किए गए हैं। इसके बाद नासिक जिले में 1,236 और चंद्रपुर जिले में 1,231 वेटलैंड्स पाए गए हैं। ये क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं और स्थानीय जलवायु तथा जैव विविधता को संतुलित रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

शहरी क्षेत्रों में बढ़ती चिंताएं

मुंबई महानगर क्षेत्र और उरण जैसे इलाकों में वेटलैंड्स पर अतिक्रमण, मलबा डंपिंग और शहरी विस्तार जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। पर्यावरण संगठनों जैसे NatConnect Foundation और Sagarshakti ने वेटलैंड सत्यापन और अधिसूचना में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरक्षण उपाय नहीं किए गए, तो इन संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्राउंड-ट्रुथिंग का अर्थ किसी चिन्हित स्थल का जमीन पर जाकर भौतिक सत्यापन करना होता है।
  • वेटलैंड्स में दलदली क्षेत्र, झीलें, तालाब, लैगून और मैंग्रोव शामिल होते हैं।
  • “नेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कोस्टल मैनेजमेंट” केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • वेटलैंड अधिसूचना कानूनी संरक्षण शुरू होने से पहले की प्रशासनिक प्रक्रिया है।
  • महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में राज्य के सबसे अधिक वेटलैंड्स पाए गए हैं।

महाराष्ट्र द्वारा वेटलैंड्स का व्यापक सत्यापन पूरा किया जाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे राज्य में जल संसाधनों की बेहतर सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

Originally written on May 20, 2026 and last modified on May 20, 2026.

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