महाराष्ट्र के 305 तालुकों में सूखा, खेती और जलापूर्ति पर बढ़ा दबाव

महाराष्ट्र के 305 तालुकों में सूखा, खेती और जलापूर्ति पर बढ़ा दबाव

महाराष्ट्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को सूखा प्रभावित क्षेत्रों का दायरा बढ़ाकर 305 तालुका कर दिया। इससे पहले 26 सितंबर को 265 तालुकों में सूखे की घोषणा की गई थी। जून से 18 सितंबर के बीच राज्य में सामान्य से 18.8 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई। कमजोर मानसून के कारण खेती, पेयजल और ग्रामीण आजीविका पर दबाव बढ़ा है।

मराठवाड़ा और विदर्भ में गंभीर स्थिति

सूखे की मार मराठवाड़ा और विदर्भ के कई हिस्सों में महसूस की जा रही है। सरकार के अनुसार, यवतमाल जिले के 16 और जलगांव जिले के 15 तालुका प्रभावित हैं। छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 74 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। नांदेड़, अमरावती और नागपुर भी गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे क्षेत्रों में शामिल हैं।

कम वर्षा का असर सोयाबीन, मक्का, कपास, संतरा, अंगूर, अनार और केले जैसी फसलों पर पड़ा है। 12 अक्टूबर तक मिली रिपोर्टों में करीब 5,000 हेक्टेयर में संतरे के पेड़ हटाए जाने और अंगूर की बेलें सूखने की जानकारी सामने आई। बागवानी फसलों को नुकसान किसानों की आय पर लंबे समय तक असर डाल सकता है, क्योंकि ऐसे पौधों को दोबारा तैयार होने में समय लगता है।

सूखे का आकलन केवल बारिश से नहीं

केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सूखा प्रबंधन मार्गदर्शिका में सूखे के आकलन के लिए वर्षा, मिट्टी की नमी और बोए गए क्षेत्र जैसे संकेतकों को शामिल किया गया है। वर्षा की तुलना सामान्य दीर्घकालीन औसत से की जाती है, लेकिन केवल वर्षा की कमी के आधार पर किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त नहीं माना जाता। कृषि और जल-संबंधी परिस्थितियों का भी मूल्यांकन किया जाता है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वर्गीकरण में मौसमी वर्षा में 20 से 59 प्रतिशत की कमी को ‘कम वर्षा’ और 60 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी को ‘बहुत कम वर्षा’ कहा जाता है। कमजोर मानसून के साथ अल नीनो की स्थिति भी चिंता का विषय है। यह उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है, जिसके फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका जताई गई है।

राहत और जल-प्रबंधन के कदम

राज्य सरकार ने भूमि-राजस्व में छूट, फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली पर रोक और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत की घोषणा की है। स्कूल परीक्षा शुल्क माफ करने तथा पेयजल और पशुओं के चारे की व्यवस्था करने के कदम भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि दिवाली से पहले किसानों के बैंक खातों में सीधे 5,000 रुपये जमा किए जाएंगे।

जल-संकट से निपटने के लिए पुणे में साप्ताहिक जलापूर्ति कटौती की गई है, नागपुर में नए बोरवेल खोदने पर रोक लगाई गई है और छत्रपति संभाजीनगर में सिंचाई के लिए पानी के उपयोग पर पाबंदियां लगाई गई हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के अनुसार, राज्य केंद्र सरकार की टीम की आगे की सहायता संबंधी सिफारिशों की प्रतीक्षा कर रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • तालुका भारत के कई राज्यों में इस्तेमाल होने वाली प्रशासनिक उप-इकाई है।
  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग मौसम संबंधी अवलोकन, पूर्वानुमान और जलवायु सेवाओं की राष्ट्रीय एजेंसी है।
  • अल नीनो, उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर से जुड़ी आवर्ती जलवायु प्रणाली ‘अल नीनो-दक्षिणी दोलन’ का एक चरण है।
  • मराठवाड़ा और विदर्भ महाराष्ट्र के क्षेत्र हैं; 14 अक्टूबर 2026 तक राज्य के 305 तालुके सूखा प्रभावित घोषित किए गए।

सूखे का बढ़ता दायरा बताता है कि महाराष्ट्र में राहत के साथ-साथ पेयजल और कृषि जल-प्रबंधन पर भी तत्काल ध्यान देना आवश्यक है।

Originally written on October 14, 2026 and last modified on October 14, 2026.

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