केरल में पारिस्थितिकी तंत्रों के संकट का पहला राष्ट्रीय आकलन

केरल में पारिस्थितिकी तंत्रों के संकट का पहला राष्ट्रीय आकलन

केरल ने अपने जंगलों, नदियों और तटीय पर्यावासों के भविष्यगत जोखिमों को समझने के लिए भारत का पहला पारिस्थितिकी तंत्र लाल सूची आकलन शुरू किया है। केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड ने 14 अक्टूबर 2026 को कोल्लम में इस एक-वर्षीय परियोजना की शुरुआत की। इसमें राज्य के सभी 14 जिलों के पारिस्थितिकी तंत्रों के ढहने के खतरे का अध्ययन किया जाएगा।

प्रजातियों से आगे बढ़कर पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर नजर

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की पारिस्थितिकी तंत्र लाल सूची पद्धति किसी पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के नष्ट या गंभीर रूप से बदल जाने के जोखिम का आकलन करती है। यह प्रजातियों की लाल सूची से अलग है, जो मुख्य रूप से किसी जीव-प्रजाति के विलुप्त होने के खतरे पर केंद्रित होती है। इस आकलन में पाँच मानकीकृत मानदंड अपनाए जाते हैं। इनमें पर्यावास का ऐतिहासिक नुकसान, उसका खंडित होना और जल-प्रवाह में बदलाव जैसे पहलू शामिल हैं। जोखिम के आधार पर पारिस्थितिकी तंत्रों को ‘अति संकटग्रस्त’, ‘संकटग्रस्त’ और ‘सुभेद्य’ जैसी श्रेणियों में रखा जा सकता है।

राज्य के विविध पर्यावासों का होगा अध्ययन

परियोजना में ऊँचे पर्वतीय शिखरों से लेकर तटीय क्षेत्रों तक के जंगलों, नदियों और तटीय पर्यावासों का आकलन होगा। केरल में दक्षिणी पश्चिमी घाट के उष्णकटिबंधीय नदी-तटीय सदाबहार वन, ऊँचाई पर पाए जाने वाले शोला-घासभूमि क्षेत्र, तटीय मैंग्रोव और मिरिस्टिका दलदल जैसे विशिष्ट पर्यावास हैं। आकलन में पर्यावासों की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन से जुड़े और मानवीय गतिविधियों से पैदा हुए दबावों को भी दर्ज किया जाएगा। शहरी विस्तार और समुद्र-स्तर में वृद्धि राज्य के कुछ पर्यावासों के लिए उभरते खतरे हैं।

स्थानीय योजना और पुनर्स्थापन के लिए उपयोगी निष्कर्ष

केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड इस परियोजना का वित्तपोषण कर रहा है। इसे केरल वन अनुसंधान संस्थान और एमईएस अस्माबी कॉलेज का पारिस्थितिकी, वर्गिकी, संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन केंद्र संयुक्त रूप से पूरा करेंगे। डॉ. अमिता बच्चन के.एच. और डॉ. दीपु सिवदास इसके प्रमुख शोधकर्ता हैं। परियोजना से आधिकारिक जोखिम रजिस्टर, पारिस्थितिकी तंत्र वर्गीकरण एटलस और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के प्राथमिकता मानचित्र तैयार होने की उम्मीद है। इन्हें राज्य की योजना प्रणालियों में शामिल करने और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों तथा पंचायतों तक उपलब्ध कराने की योजना है। इससे संरक्षण और पुनर्स्थापन से जुड़े स्थानीय फैसलों को पर्यावासों की वास्तविक स्थिति के आधार पर लेने में मदद मिल सकती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईयूसीएन की पारिस्थितिकी तंत्र लाल सूची पाँच मानकीकृत मानदंडों के आधार पर ढहने का जोखिम आंकती है।
  • पश्चिमी घाट प्रायद्वीपीय भारत के पश्चिमी भाग में फैली पर्वत शृंखला है।
  • केरल के सभी 14 जिले इस आकलन के दायरे में हैं।
  • मिरिस्टिका दलदल पश्चिमी घाट क्षेत्र में पाए जाने वाले मीठे पानी के दलदली पारिस्थितिकी तंत्र हैं।

यह पहल केरल के प्राकृतिक पर्यावासों पर बढ़ते दबाव को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने और संरक्षण के लिए प्राथमिकताएँ तय करने का आधार बनेगी।

Originally written on October 14, 2026 and last modified on October 14, 2026.

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