मदनपल्ले से रायलसीमा की बागवानी अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार
आंध्र प्रदेश ने अनंतपुर जिले के मदनपल्ले में 1 लाख करोड़ रुपये के ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की आधारशिला रखकर रायलसीमा क्षेत्र के कृषि विकास को नई दिशा देने की पहल की है। यह परियोजना 10 जिलों में फैली होगी और इसका उद्देश्य सूखे से प्रभावित इस क्षेत्र में बागवानी उत्पादन, निवेश और बाजार-लिंक्ड ढांचे को मजबूत करना है।
रायलसीमा के लिए बहु-चरणीय विकास योजना
यह परियोजना “रायलसीमा राइजिंग” नाम से अगस्त 2026 से जुलाई 2029 तक बहु-चरणीय रूप में लागू की जाएगी। इसमें अनंतपुर, अन्नामय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंद्याल, श्री सत्य साईं, तिरुपति, कडपा, प्रकाशम और मार्कापुरम क्षेत्र शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बागवानी को केवल खेती तक सीमित न रखकर उसे प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और निर्यात-उन्मुख ढांचे से जोड़ा जाए।
निवेश, क्लस्टर मॉडल और कार्यान्वयन ढांचा
इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1 लाख करोड़ रुपये है। इसमें टीडीपी-नीत एनडीए सरकार की ओर से 40,352 करोड़ रुपये का योगदान तय किया गया है, जबकि 60,000 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है। परियोजना को 201 क्लस्टरों के माध्यम से लागू किया जाएगा, जो 303 मंडलों और 5,869 गांवों में फैले होंगे।
क्लस्टर-आधारित मॉडल का उद्देश्य छोटे-छोटे कृषि क्षेत्रों को एकीकृत ढांचे में लाना है, ताकि सिंचाई, सड़क, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग और बाजार संपर्क जैसी सुविधाओं की योजना एक साथ बनाई जा सके।
बागवानी उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
रायलसीमा को लंबे समय से सूखा-प्रवण क्षेत्र माना जाता है। इसी कारण यहां पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है। योजना के तहत बागवानी क्षेत्र को 6 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने और कुल क्षेत्रफल को 14.41 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्पादन लक्ष्य भी काफी बड़ा रखा गया है। मौजूदा 222 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इसे बढ़ाकर 435 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचाने की योजना है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ने की संभावना है, बल्कि क्षेत्र में कृषि-आधारित उद्योगों और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
मदनपल्ले में कृषि शिक्षा को भी बढ़ावा
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के साथ मदनपल्ले में इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर भी शुरू किया गया है। यह संस्थान कृषि में तकनीक, अनुसंधान और नवाचार पर केंद्रित रहेगा। इसे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है।
इस पहल से यह संकेत मिलता है कि आंध्र प्रदेश अब कृषि को केवल उत्पादन के स्तर पर नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और निवेश-आधारित विकास मॉडल के रूप में आगे बढ़ाना चाहता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- बागवानी में फल, सब्जियां, फूल, मसाले, प्लांटेशन फसलें और औषधीय पौधों की खेती शामिल होती है।
- आंध्र प्रदेश भारत में आम, केला, मिर्च और टमाटर के प्रमुख उत्पादक राज्यों में गिना जाता है।
- रायलसीमा का पारंपरिक क्षेत्रीय वर्गीकरण चार जिलों—अनंतपुर, चित्तूर, कडपा और कुरनूल—पर आधारित माना जाता है।
- क्लस्टर-आधारित विकास कृषि परियोजनाओं में गांवों और मंडलों को एक इकाई मानकर अवसंरचना और बाजार संपर्क की योजना बनाने की पद्धति है।
मदनपल्ले से शुरू हुई यह पहल रायलसीमा की कृषि संरचना को अधिक उत्पादक, संगठित और निवेश-आकर्षक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।