मंगल के जल-अतीत की पड़ताल में तमिलनाडु और चिली के खनिज स्थल
भारतीय वैज्ञानिकों ने तमिलनाडु और चिली में ऐसे स्थल पहचाने हैं, जहां मिलने वाले खनिज मंगल ग्रह की भूवैज्ञानिक परिस्थितियों को समझने में मदद कर सकते हैं। नेवेली में मिला मेलेंटेराइट और तिरुचिरापल्ली के बैडलैंड्स तथा चिली के अटाकामा मरुस्थल में पाया गया जिप्सम जल और चट्टानों के बीच हुई पुरानी अंतःक्रियाओं के संकेत संजो सकते हैं।
पृथ्वी पर मंगल जैसे भूवैज्ञानिक संकेत
किसी दूसरे ग्रह या खगोलीय पिंड की परिस्थितियों और प्रक्रियाओं का अध्ययन करने के लिए पृथ्वी पर चुने गए समान वातावरण या पदार्थ को स्थलीय अनुरूप स्थल कहा जाता है। ऐसे स्थलों से वैज्ञानिक उन खनिजों और भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं का विश्लेषण कर सकते हैं, जो मंगल पर भी देखी जाती हैं।
तमिलनाडु के नेवेली में मेलेंटेराइट और तिरुचिरापल्ली के बैडलैंड्स में जिप्सम की पहचान हुई है। जिप्सम चिली के अटाकामा मरुस्थल में भी मिला। इन स्थलों के खनिजों और भूवैज्ञानिक परिस्थितियों में मंगल से जुड़ी कुछ समानताएं हैं। अटाकामा का अत्यंत शुष्क वातावरण भी ग्रह-विज्ञान संबंधी शोध में उपयोगी स्थलीय उदाहरण माना जाता है।
जलयुक्त सल्फेट खनिज क्या बताते हैं?
जिप्सम और मेलेंटेराइट जलयुक्त सल्फेट खनिज हैं। इनके क्रिस्टल ढांचे में पानी मौजूद रहता है। जिप्सम का रासायनिक सूत्र CaSO₄·2H₂O है, जबकि मेलेंटेराइट का सूत्र FeSO₄·7H₂O है। इन खनिजों का अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि किसी स्थान पर पानी और चट्टानों की परस्पर क्रिया कब और किन परिस्थितियों में हुई होगी।
मेलेंटेराइट का संबंध कुछ समय तक बनी रहने वाली नम, अम्लीय और ऑक्सीकरणकारी परिस्थितियों से है। यह सल्फाइड खनिजों के ऑक्सीकरण से बन सकता है—ऐसी प्रक्रिया, जो मंगल पर सल्फेट खनिजों के निर्माण को समझने के लिए प्रासंगिक है। जिप्सम जलीय वातावरण में बनता है और पुराने जल की मौजूदगी का प्रमाण सुरक्षित रख सकता है। इसकी खनिज संरचना में प्राचीन जीवन के संभावित निशान भी बाद के पर्यावरणीय बदलावों से कुछ हद तक सुरक्षित रह सकते हैं।
लेजर तकनीक से हुई खनिजों की पहचान
शोध का नेतृत्व केरल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में डीएसटी-फिस्ट कार्यक्रम के परियोजना समन्वयक डॉ. साजिन कुमार के.एस. ने किया। वैज्ञानिकों ने उन्नत लेजर रमन स्पेक्ट्रोमीटर की सहायता से नमूनों की पहचान की। रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी में पदार्थ पर प्रकाश डालने के बाद बिखरे प्रकाश में होने वाले बदलावों को मापा जाता है। हर पदार्थ का विशिष्ट वर्णक्रमीय संकेत उसकी पहचान में मदद करता है।
इस शोध के निष्कर्ष जर्नल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च: प्लैनेट्स में प्रकाशित दो शोधपत्रों में आए। इनमें इन स्थलों को मंगल पर पुराने जल-प्रवाह और संभावित रूप से रहने योग्य परिस्थितियों की पड़ताल के लिए उपयोगी स्थलीय अनुरूप बताया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मंगल सूर्य से चौथा ग्रह है और इसे स्थलीय ग्रहों की श्रेणी में रखा जाता है।
- जिप्सम जलयुक्त कैल्शियम सल्फेट है; इसका सूत्र CaSO₄·2H₂O है।
- मेलेंटेराइट जलयुक्त लौह सल्फेट खनिज है; इसका सूत्र FeSO₄·7H₂O है।
- अटाकामा मरुस्थल मुख्य रूप से चिली के उत्तरी हिस्से में स्थित है।
तमिलनाडु के ये स्थल और अटाकामा मरुस्थल मंगल के खनिज अभिलेखों को समझने के लिए पृथ्वी पर उपलब्ध तुलनात्मक उदाहरण हैं। इनसे ग्रह पर पानी की पुरानी मौजूदगी और पर्यावरणीय बदलावों के संकेतों की जांच को दिशा मिल सकती है।