चंद्रमा के सिकुड़ने से उभरे 10 हजार से अधिक भ्रंश

चंद्रमा के सिकुड़ने से उभरे 10 हजार से अधिक भ्रंश

चंद्रमा के भीतर धीरे-धीरे ठंडक आने से उसका आकार घट रहा है और इसकी सतह पर बने भ्रंश इस बदलाव के निशान हैं। 14 अक्टूबर 2026 को ‘द प्लैनेटरी साइंस जर्नल’ में प्रकाशित एक अध्ययन ने चंद्रमा पर 10 हजार से अधिक युवा भ्रंशों की पहचान की है। शोधकर्ताओं ने नासा के लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर कैमरा से प्राप्त तस्वीरों का विश्लेषण किया।

चंद्रमा का सिकुड़ना और भ्रंशों का बनना

अध्ययन के अनुसार, पिछले 40 से 80 करोड़ वर्षों में चंद्रमा की त्रिज्या लगभग 45 मीटर कम हुई है। यदि यह दर लगातार बनी रही हो, तो चंद्रमा हर दस लाख वर्ष में करीब 6 से 11 सेंटीमीटर सिकुड़ रहा है। सालाना आधार पर यह बदलाव बेहद सूक्ष्म है, लेकिन भूवैज्ञानिक समय के लंबे अंतराल में इसका असर सतह पर दिखाई देता है।

चंद्रमा के सिकुड़ने से उसकी पपड़ी पर दबाव पड़ता है। इस संपीड़न के कारण थ्रस्ट भ्रंश बन सकते हैं। इनमें कम ढलान वाली दरार के एक ओर की चट्टान दूसरी ओर की चट्टान के ऊपर खिसक जाती है। चंद्रमा पर ऐसे भूगर्भीय बदलावों के सतही संकेतों में लोबेट स्कार्प और छोटे मारे रिज शामिल हैं।

सतह की बनावट और चंद्रकंप

लोबेट स्कार्प घुमावदार, चट्टानी ढलान जैसे भू-आकार होते हैं, जो भ्रंश के किनारे चट्टानों के खिसकने से बनते हैं। मारे रिज चंद्रमा के गहरे रंग वाले विस्तृत मैदानों में उभरी हुई संरचनाएं हैं। इन मैदानों को ‘लूनर मारिया’ कहा जाता है और वे मुख्यतः प्राचीन बेसाल्टिक लावा प्रवाह से बने हैं।

नए अध्ययन में दर्ज भ्रंश चंद्रमा के अलग-अलग हिस्सों में फैले हैं और भूवैज्ञानिक दृष्टि से युवा माने गए हैं। इन पर हलचल होने से चंद्रकंप पैदा हो सकते हैं। पृथ्वी के विपरीत, चंद्रमा कई विवर्तनिक प्लेटों में बंटा हुआ नहीं है; वह एकल-प्लेट पिंड है। फिर भी उसकी सतह पर अलग-अलग स्थानों पर चंद्रकंप आ सकते हैं और उनके बारे में पहले से चेतावनी मिलना कठिन है।

भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए अहम संकेत

नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम सहित भविष्य के कुछ प्रस्तावित चंद्र अभियानों के उतरने के स्थल सक्रिय भ्रंश क्षेत्रों के पास हो सकते हैं। इसलिए शोधकर्ता स्थल चयन और सतह पर गतिविधियों की योजना बनाते समय भूकंपीय जोखिम का आकलन शामिल करने की सलाह देते हैं। अध्ययन में यह भी संकेत है कि मोटी चंद्र पपड़ी वाले क्षेत्रों में भ्रंश कम दिखाई देते हैं। ऐसे क्षेत्रों को भविष्य के चंद्र बुनियादी ढांचे के लिए जगह चुनते समय ध्यान में रखा जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नासा ने चंद्रमा के अध्ययन और सतह का मानचित्रण करने के लिए लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर को 2009 में प्रक्षेपित किया था।
  • लूनर मारिया विस्तृत मैदान हैं, जो मुख्यतः प्राचीन बेसाल्टिक लावा प्रवाह से बने हैं।
  • थ्रस्ट भ्रंश संपीड़न के दबाव में बनते हैं, जब चट्टान का एक खंड दूसरे के ऊपर खिसकता है।
  • आर्टेमिस नासा का मानवयुक्त चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम है।

चंद्रमा पर मिले ये भूगर्भीय संकेत बताते हैं कि वह स्थिर पिंड नहीं है। भविष्य के अभियानों की सुरक्षा के लिए उसकी सतह की संरचना और चंद्रकंप के जोखिम को समझना जरूरी होगा।

Originally written on October 17, 2026 and last modified on October 17, 2026.

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