भारत-लाइबेरिया की नई समुद्री पहल से शिपिंग सुरक्षा को बढ़ावा
भारत और लाइबेरिया ने न्यूयॉर्क में “शिपिंग और सीफेयरर्स की सुरक्षा व संरक्षा के लिए मित्र समूह” की शुरुआत की है। यह पहल 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान सामने आई और इसका उद्देश्य समुद्री परिवहन, जहाजों की सुरक्षा तथा समुद्री कर्मियों के हितों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।
समुद्री सुरक्षा क्यों बनी वैश्विक चिंता
समुद्री सुरक्षा का दायरा केवल जहाजों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें माल, चालक दल, समुद्री मार्ग और बंदरगाहों की सुरक्षा भी शामिल होती है। हाल के वर्षों में होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर, काला सागर और खाड़ी क्षेत्र जैसे अहम समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे में समुद्री व्यापार की निरंतरता और वैश्विक आपूर्ति शृंखला की स्थिरता के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हो गए हैं।
भारत और लाइबेरिया की भूमिका क्यों अहम है
भारत दुनिया के प्रमुख सीफेयरर आपूर्तिकर्ता देशों में शामिल है, जबकि लाइबेरिया टन भार के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा शिपिंग रजिस्ट्री केंद्र है। शिपिंग रजिस्ट्री वह राष्ट्रीय पंजीकरण व्यवस्था होती है, जिसके तहत व्यापारी जहाजों को ध्वज, कानूनी मान्यता और तकनीकी अनुपालन से जोड़ा जाता है। दोनों देशों की यह भूमिका इस पहल को व्यावहारिक और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनाती है।
इस समूह की सह-अध्यक्षता भारत और लाइबेरिया करेंगे। न्यूयॉर्क में हुई पहली बैठक में 25 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें रूस, जर्मनी और जापान भी थे। यह संकेत है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय चिंता का विषय बन चुकी है।
समूह का ढांचा और उद्देश्य
यह नया गठबंधन अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के ढांचे के भीतर काम करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन जहाजरानी सुरक्षा और समुद्री प्रदूषण की रोकथाम से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन श्रम मानकों और सीफेयरर्स से जुड़े नियमों को तय करने में भूमिका निभाता है।
समूह के प्रमुख उद्देश्यों में जहाजों के लिए तकनीकी मानकों को बढ़ावा देना, समुद्री नियमों के पालन को सुनिश्चित करना, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सीफेयरर्स के कल्याण को आगे बढ़ाना शामिल है। इस तरह यह पहल सुरक्षा, श्रम और पर्यावरण—तीनों आयामों को एक साथ जोड़ती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- “Group of Friends on Safety & Security of Shipping & Seafarers” एक बहुपक्षीय पहल है।
- इसकी शुरुआत 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सप्ताह के दौरान हुई।
- भारत और लाइबेरिया इस समूह के सह-अध्यक्ष हैं।
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन समुद्री सुरक्षा और समुद्री प्रदूषण रोकथाम से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है।
समुद्री व्यापार पर बढ़ते जोखिमों के बीच यह पहल वैश्विक शिपिंग व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, नियमबद्ध और मानवीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।