भारत में सस्ती जिंक-एयर बैटरी तकनीक से ऊर्जा भंडारण को नई दिशा

भारत में सस्ती जिंक-एयर बैटरी तकनीक से ऊर्जा भंडारण को नई दिशा

भारतीय वैज्ञानिकों ने 2024 और 2025 में जिंक-एयर बैटरी से जुड़ी कई नई तकनीकें विकसित की हैं, जिनमें कम लागत वाले इलेक्ट्रोलाइट, बेहतर कैटेलिस्ट और यांत्रिक रूप से रिचार्ज होने वाली प्रणालियाँ शामिल हैं। यह शोध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिंक-एयर बैटरियों को लिथियम-आयन बैटरियों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऊर्जा भंडारण और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए।

जिंक-एयर बैटरी क्यों चर्चा में है

जिंक-एयर बैटरी एक मेटल-एयर बैटरी है, जिसमें जिंक एनोड के रूप में काम करता है और हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन कैथोड रिएक्टेंट होती है। इस रासायनिक प्रक्रिया में जिंक का ऑक्सीकरण और ऑक्सीजन का अपचयन होता है, जिससे बिजली पैदा होती है। इन बैटरियों की खासियत यह है कि इनमें जिंक जैसी प्रचुर और अपेक्षाकृत सस्ती धातु का उपयोग होता है, जिससे लागत घटाने की संभावना बनती है।रिचार्जेबल डिजाइनों में अक्सर पानी-आधारित इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किया जाता है, जो कई लिथियम-आयन प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले ऑर्गेनिक इलेक्ट्रोलाइट की तुलना में कम ज्वलनशील होते हैं। यही कारण है कि इन्हें सुरक्षित और बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

भारतीय शोध में क्या नया हुआ

सास्त्रा डीम्ड यूनिवर्सिटी में डॉ. एस. देवराज के नेतृत्व वाली टीम ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एक नैनोफ्लूड इलेक्ट्रोलाइट विकसित किया है। इसमें सिलिका और जिंक ऑक्साइड नैनोपार्टिकल्स का उपयोग किया गया है और यह प्रयोगशाला परिस्थितियों में तीन महीने से अधिक समय तक स्थिर रहा।इसी टीम ने कॉपर-डोप्ड मैंगनीज डाइऑक्साइड कैटेलिस्ट भी विकसित किया। इसके अलावा, घरेलू पानी-फिल्टर के फेंके गए कार्बन और सर्जिकल फेस मास्क को बैटरी-उपयोगी कार्बन सामग्री में बदलने की दिशा में भी काम किया गया है। यह पहल लागत घटाने और कचरे के पुन: उपयोग, दोनों दृष्टि से अहम है।

इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण में संभावनाएँ

आईआईटी मद्रास के शोधकर्ता, जिनमें डॉ. अरविंद कुमार चंद्रिरन शामिल हैं, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यांत्रिक रूप से रिचार्ज होने वाली जिंक-एयर बैटरियों पर काम कर रहे हैं। इस दिशा में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने 9 अक्टूबर 2024 को आईआईटी मद्रास के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, ताकि 1 kWh का इलेक्ट्रिकली रिचार्जेबल जिंक-एयर बैटरी प्रोटोटाइप विकसित किया जा सके।इस प्रोटोटाइप में पानी-आधारित इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग किया जा रहा है और इसमें ज्वलनशील सामग्री नहीं है। शोधकर्ताओं का ध्यान दोपहिया, तिपहिया और लंबे समय तक ऊर्जा भंडारण जैसी जरूरतों पर है, जहाँ कम लागत और सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जिंक-एयर बैटरियाँ मेटल-एयर बैटरियों की श्रेणी में आती हैं।
  • इनमें जिंक एनोड और हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन कैथोड रिएक्टेंट के रूप में काम करती है।
  • प्लैटिनम और रूथेनियम जैसे नोबल-मेटल कैटेलिस्ट इलेक्ट्रोकेमिकल प्रणालियों में आमतौर पर उपयोग किए जाते हैं।
  • हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी जिंक उत्पादक कंपनी है।

लागत के लिहाज से जिंक-एयर बैटरियों को लगभग 150 अमेरिकी डॉलर प्रति kWh आंका गया है, जबकि लिथियम-आयन बैटरियों की लागत लगभग 200 से 250 अमेरिकी डॉलर प्रति kWh बताई जाती है। यदि इन तकनीकों का व्यापक स्तर पर उपयोग बढ़ता है, तो जिंक-एयर बैटरियों की लागत 100 अमेरिकी डॉलर प्रति kWh से भी नीचे आने की संभावना है।

Originally written on July 24, 2026 and last modified on July 24, 2026.

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