भारत में भालुओं की पहली राष्ट्रीय गणना से संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देश में पाई जाने वाली भालू की चारों प्रजातियों की आबादी का आकलन करने के लिए पहला राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन तैयार कर रहा है। इसमें उनकी संख्या के साथ वितरण, भौगोलिक विस्तार और उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहाँ उनके रहने के लिए महत्वपूर्ण आवास मौजूद हैं।
भारत में भालुओं की चार प्रजातियाँ
भालू स्तनधारी जीव हैं और उनका वर्गीकरण उर्सिडी परिवार में किया जाता है। भारत में हिमालयी भूरा भालू, एशियाई काला भालू, स्लॉथ भालू और सन भालू पाए जाते हैं। इन प्रजातियों के आवास और भौगोलिक फैलाव एक-दूसरे से अलग हैं, इसलिए एक ही क्षेत्र या प्रजाति के आधार पर पूरे देश की स्थिति समझना संभव नहीं है।
हिमालयी भूरा भालू हिमालय के कुछ हिस्सों में मिलता है, जबकि एशियाई काला भालू हिमालयी वन क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत में पाया जाता है। स्लॉथ भालू भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ हिस्सों में रहता है। सन भालू का निवास पूर्वोत्तर भारत के उष्णकटिबंधीय वन हैं। इन भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए अध्ययन प्रजातिवार उपस्थिति और उनके क्षेत्रों का नक्शा तैयार करेगा।
मैदानी साक्ष्यों से होगा आकलन
शोधकर्ता भालुओं की मौजूदगी और गतिविधियों के प्रमाण जुटाने के लिए स्वचालित कैमरों, पैरों के निशानों और मल के नमूनों का उपयोग करेंगे। कैमरा ट्रैप क्षेत्र से गुजरने वाले वन्यजीवों की तस्वीरें दर्ज करते हैं। पदचिह्न और मल के नमूने किसी इलाके में प्रजाति की मौजूदगी का संकेत दे सकते हैं। अलग-अलग प्रकार के साक्ष्यों को मिलाकर किसी क्षेत्र में भालुओं की उपस्थिति और आवाजाही को समझने में मदद मिलेगी।
अध्ययन उन स्थानों पर भी ध्यान देगा जहाँ पहले भालू देखे जाने की जानकारी थी, लेकिन अब उनकी मौजूदगी दर्ज नहीं हो रही है। शोधकर्ता यह जाँचेंगे कि ऐसे बदलावों का संबंध आवास में परिवर्तन, वन क्षरण या मानवीय दबाव से हो सकता है या नहीं। यह आकलन केवल संख्या गिनने तक सीमित नहीं होगा; इससे प्रजातियों के मौजूदा वितरण और उनके भौगोलिक विस्तार की भी जानकारी जुटाई जाएगी।
मानव-भालू मुठभेड़ों और संरक्षण की योजना
उत्तराखंड में मनुष्यों और भालुओं के बीच मुठभेड़ की घटनाएँ सामने आती रही हैं, जिनमें कुछ घटनाएँ जानलेवा भी रही हैं। भालुओं के मौजूदगी वाले क्षेत्रों और उनके वितरण की जानकारी से वन विभाग को निगरानी की योजना बनाने, स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ाने और ऐसे इलाकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है जहाँ आवास में सुधार की जरूरत है।
स्लॉथ भालू की आबादी का एक पुराना अनुमान भारतीय उपमहाद्वीप के लिए लगभग 20,000 था। यह आँकड़ा केवल भारत का अनुमान नहीं है। प्रस्तावित अध्ययन से इस पुराने आकलन को वैज्ञानिक रूप से परखने और अधिक अद्यतन जानकारी जुटाने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय स्तर पर चारों प्रजातियों को शामिल करने से संरक्षण की प्राथमिकताएँ तय करने के लिए व्यापक आधार बन सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून में स्थित है।
- भारत में भालू की चार प्रजातियाँ हिमालयी भूरा भालू, एशियाई काला भालू, स्लॉथ भालू और सन भालू हैं।
- भालू स्तनधारी हैं और उर्सिडी परिवार से संबंधित हैं।
- स्लॉथ भालू का लगभग 20,000 का पुराना अनुमान भारतीय उपमहाद्वीप के लिए था, केवल भारत के लिए नहीं।
चारों प्रजातियों पर एकसाथ जुटने वाले प्रमाण देश में उनके वितरण और आवास की स्थिति को अधिक स्पष्ट करेंगे। इससे निगरानी और संरक्षण संबंधी कदमों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनाने में सहायता मिल सकती है।