भारत में पहली 100 MWh वैनाडियम फ्लो बैटरी परियोजना को मंजूरी
भारत ने ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाते हुए अपनी पहली 100 MWh क्षमता वाली वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना गुजरात के खावड़ा सोलर पार्क में लगाई जाएगी, जो देश के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा केंद्रों में से एक बन रहा है। इस पहल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ग्रिड-स्तरीय बैटरी स्टोरेज में भारत की घरेलू तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाती है।
खावड़ा में लगेगी देश की सबसे बड़ी फ्लो बैटरी
एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने 20-21 जुलाई 2026 को इस परियोजना का ठेका दिया। प्रणाली की स्थापना 2027 में प्रस्तावित है और इसके साथ 10 वर्षों की संचालन एवं रखरखाव सेवा भी शामिल होगी। यह भारत की पहली और सबसे बड़ी ग्रिड-स्केल वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली होगी।इस परियोजना की इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन जिम्मेदारी Bondada Engineering Limited को दी गई है, जबकि बैटरी तकनीक के लिए Delectrik Systems Pvt Ltd को तकनीकी साझेदार बनाया गया है। खास बात यह है कि यह देश की पहली गैर-लिथियम, उपयोगिता-स्तरीय बैटरी स्टोरेज प्रणाली होगी, जिसे 100% भारत में डिजाइन, इंजीनियर और निर्मित किया गया है।
वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी क्या है
वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी एक रिचार्जेबल बैटरी तकनीक है, जिसमें ऊर्जा को वैनाडियम आयनों वाले तरल इलेक्ट्रोलाइट घोल में संग्रहीत किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ऊर्जा भंडारण क्षमता और पावर आउटपुट को अलग-अलग डिजाइन किया जा सकता है। यानी टैंक का आकार बढ़ाकर बड़ी क्षमता वाली प्रणाली बनाई जा सकती है।इस तकनीक में वैनाडियम के कई ऑक्सीकरण अवस्थाओं का उपयोग होता है, जिससे पॉजिटिव और नेगेटिव इलेक्ट्रोलाइट के बीच क्रॉस-कंटैमिनेशन कम होता है। यही कारण है कि इसे स्थिर ग्रिड स्टोरेज के लिए उपयुक्त माना जाता है।
ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड स्थिरता के लिए क्यों अहम
नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, जैसे सौर और पवन, लगातार बिजली नहीं देते। दिन में अधिक उत्पादन और रात में कम उत्पादन जैसी स्थिति में बैटरी स्टोरेज सिस्टम बिजली को संचित कर बाद में उपलब्ध कराते हैं। इससे ग्रिड बैलेंसिंग, पीक लोड मैनेजमेंट और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर एकीकरण में मदद मिलती है।खावड़ा सोलर पार्क इस संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। गुजरात में स्थित यह पार्क 2029 तक 30 GW क्षमता वाला दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क बनने की योजना में है। ऐसे बड़े ऊर्जा केंद्रों के साथ उच्च क्षमता वाले स्टोरेज सिस्टम का जुड़ना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वदेशी विनिर्माण दोनों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- वैनाडियम रेडॉक्स फ्लो बैटरी एक फ्लो बैटरी तकनीक है, जिसमें तरल इलेक्ट्रोलाइट का उपयोग होता है।
- यह परियोजना भारत की पहली 100 MWh ग्रिड-स्केल VRFB BESS है।
- खावड़ा सोलर पार्क गुजरात में स्थित है और 2029 तक 30 GW क्षमता तक पहुंचने की योजना है।
- Delectrik Systems ने इससे पहले 2025 में ग्रेटर नोएडा, NTPC में 3 MWh VRFB सिस्टम स्थापित किया था।
यह परियोजना भारत में बैटरी स्टोरेज के घरेलू विकास, गैर-लिथियम विकल्पों और बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।