भारत में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड की शुरुआत से बॉन्ड मार्केट को नई दिशा

भारत में टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड की शुरुआत से बॉन्ड मार्केट को नई दिशा

भारत के कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में डिजिटल बदलाव की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया ने 11 सितंबर 2026 को देश का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड जारी कराने में मदद की। यह इश्यू SEBI के डिमैट 2.0 पायलट के तहत हुआ और इसका इश्यूअर IIFL फाइनेंस रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि अब बॉन्ड बाजार में निपटान, रिकॉर्ड-कीपिंग और लेनदेन की प्रक्रिया अधिक तेज और तकनीक-आधारित हो सकती है।

डिमैट 2.0 पायलट क्या है

डिमैट 2.0 भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य कॉरपोरेट बॉन्ड जैसे ऋण साधनों के निपटान को आधुनिक डिजिटल ढांचे से जोड़ना है। इस पायलट में ब्लॉकचेन-आधारित प्रक्रियाओं, स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स और RBI की होलसेल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी, यानी e₹, का उपयोग किया जा रहा है।

इस व्यवस्था में कॉरपोरेट बॉन्ड डिजिटल टोकन के रूप में वितरित लेजर पर बनाए जाते हैं। हालांकि, स्वामित्व का आधिकारिक रिकॉर्ड भारत की वैधानिक डिपॉजिटरी संस्थाओं—नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड और सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड—के पास ही बना रहता है।

निपटान में क्या बदलेगा

टोकनाइज्ड बॉन्ड को RBI की होलसेल CBDC से यूनिफाइड मार्केट इंटरफेस के जरिए जोड़ा गया है। इससे एटॉमिक सेटलमेंट संभव होता है, यानी बॉन्ड और भुगतान एक ही समय पर स्थानांतरित होते हैं। पारंपरिक बॉन्ड निपटान में आम तौर पर दो से तीन दिन लगते हैं, जबकि इस पायलट का लक्ष्य उसी दिन निपटान की सुविधा देना है।

यह बदलाव केवल गति तक सीमित नहीं है। इससे लेनदेन की पारदर्शिता, प्रक्रिया की सटीकता और संस्थागत निवेशकों के लिए संचालन में आसानी बढ़ने की उम्मीद है।

अब तक किन कंपनियों ने हिस्सा लिया

इस पायलट के तहत पहले इश्यूअर REC लिमिटेड रहा, जिसने 7 सितंबर 2026 को 18 निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद L&T लिमिटेड ने 9 सितंबर 2026 को चार निवेशकों से 500 करोड़ रुपये जुटाए। IIFL फाइनेंस तीसरा इश्यूअर बना और 9 सितंबर 2026 को एक निवेशक से 25 करोड़ रुपये जुटाए। इस तरह पायलट के जरिए कुल 1,025 करोड़ रुपये तीन कंपनियों से जुटाए जा चुके हैं।

पायलट की शुरुआत मुंबई में 10 सितंबर 2026 को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान की गई थी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और आगे चलकर मौजूदा RFQ प्लेटफॉर्म्स के जरिए ट्रेडिंग तथा खुदरा निवेशकों की संभावित भागीदारी पर भी विचार किया जा सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • टोकनाइज्ड बॉन्ड ऋण साधनों की डिजिटल अभिव्यक्ति होते हैं, जिन्हें वितरित लेजर पर दर्ज किया जाता है।
  • एटॉमिक सेटलमेंट में प्रतिभूति और धन का हस्तांतरण एक साथ होता है।
  • होलसेल CBDC का उपयोग मुख्य रूप से बैंकों और संस्थागत लेनदेन के लिए होता है, खुदरा भुगतान के लिए नहीं।
  • SEBI भारत के प्रतिभूति बाजार को नियंत्रित करता है, जबकि RBI मुद्रा जारी करने और मौद्रिक नीति के लिए जिम्मेदार है।

यह पहल भारतीय बॉन्ड बाजार में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में कॉरपोरेट ऋण बाजार में निपटान तेज, अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम हो सकता है।

Originally written on September 15, 2026 and last modified on September 15, 2026.

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