भारत के जंगलों में लैंटाना का फैलाव, संरक्षण के लिए बढ़ती चुनौती
अमेरिकी मूल का आक्रामक झाड़ीदार पौधा लैंटाना (Lantana camara) भारत के वन पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से फैल रहा है। अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आकलनों में इसका फैलाव 1.3 करोड़ हेक्टेयर से अधिक बताया गया है। अलग-अलग अध्ययनों के अनुमान में बड़ा अंतर है, लेकिन वे इस बात पर सहमत हैं कि यह पौधा जंगलों और स्थानीय वनस्पतियों के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है।
फैलाव के अलग-अलग आकलन
जुलाई 2026 में ‘ग्लोबल इकोलॉजी एंड कंजर्वेशन’ में प्रकाशित अध्ययन ने लैंटाना का क्षेत्रफल लगभग 1.54 लाख वर्ग किलोमीटर यानी 1.54 करोड़ हेक्टेयर आंका। निनाद मुंगी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में राष्ट्रीय बाघ आकलन परियोजना के आंकड़ों का उपयोग किया गया। इसके अनुसार, लैंटाना भारत के 40 प्रतिशत से अधिक बाघ आवास क्षेत्रों में मौजूद है।
अन्य आकलनों में इसका फैलाव इससे अधिक बताया गया है। दिसंबर 2025 के कुछ विवरणों में घने लैंटाना झुरमुटों का क्षेत्र लगभग 7.4 करोड़ एकड़, यानी करीब 2.99 करोड़ हेक्टेयर आंका गया। वर्ष 2025 के एक अध्ययन ने इसे भारत के 44 प्रतिशत वन क्षेत्र के लिए खतरा बताया। इन आंकड़ों में अंतर अध्ययन की पद्धति, समय और फैलाव की परिभाषा के कारण हो सकता है। हिमाचल प्रदेश में भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, लगभग 3,25,282 हेक्टेयर वन क्षेत्र लैंटाना से प्रभावित था।
वनस्पतियों और वन प्रबंधन पर असर
लैंटाना घने झुरमुट बनाकर दूसरी वनस्पतियों की वृद्धि रोक सकता है। यह रासायनिक पदार्थ छोड़ता है, जिनसे आसपास के पौधों का विकास प्रभावित हो सकता है। तनावग्रस्त वन क्षेत्रों में इसके पनपने की क्षमता अधिक है। पक्षी इसके बीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं, जिससे इसका फैलाव जारी रहता है। इसे दुनिया की 100 सबसे खराब आक्रामक खरपतवार प्रजातियों में गिना जाता है।
मध्य प्रदेश के शुष्क वनों पर 2025 में प्रकाशित अध्ययन ने लैंटाना के पारिस्थितिक प्रभावों की पड़ताल की। इसके लिए 2017 और 2018 में मैदानी अध्ययन किया गया था। उत्तराखंड पर मार्च 2026 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि करीब ढाई दशक के उन्मूलन प्रयासों के बावजूद लैंटाना का आवास क्षेत्र 93 प्रतिशत बढ़ा। अध्ययन ने 900 से 2,000 मीटर की मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इसका प्रसार दर्ज किया।
लैंटाना को नियंत्रित करना क्यों कठिन है
लैंटाना को भारत में 19वीं शताब्दी में सजावटी उद्यान पौधे के रूप में लाया गया था। अमेरिकी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का मूल निवासी यह पौधा वर्बेनेसी कुल से संबंधित है। बगीचों के बाहर स्थापित होने के बाद यह जंगलों में फैल गया। बीजों का पक्षियों के जरिए दूर-दूर तक पहुंचना और घनी झाड़ियों का बनना इसके नियंत्रण को कठिन बनाता है। जंगलों में इसके फैलाव से स्थानीय वनस्पतियों और वन प्रबंधन, दोनों पर दबाव बढ़ता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- लैंटाना कैमारा वर्बेनेसी कुल का आक्रामक झाड़ीदार पौधा है।
- इसे भारत में 19वीं शताब्दी में उद्यानों में सजावट के लिए लाया गया था।
- राष्ट्रीय बाघ आकलन परियोजना के आंकड़ों का उपयोग बाघ आवासों में लैंटाना के फैलाव के अध्ययन में किया गया।
- भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2023 में हिमाचल प्रदेश के जंगलों में लैंटाना से प्रभावित क्षेत्र दर्ज किया गया।
अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़े फैलाव की सटीक सीमा पर भिन्न हैं, पर वे लैंटाना के बढ़ते दबाव की पुष्टि करते हैं। प्रभावी वन प्रबंधन के लिए इसके प्रसार की निगरानी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नियंत्रण प्रयास आवश्यक हैं।