कोझिकोड में दुर्लभ चित्तीदार ईगल-उल्लू की पहली तस्वीर

कोझिकोड में दुर्लभ चित्तीदार ईगल-उल्लू की पहली तस्वीर

केरल के कोझिकोड जिले के जनकिक्कड़ वन में 16 अक्टूबर 2026 को चित्तीदार ईगल-उल्लू की तस्वीर ली गई। यह जिले में इस प्रजाति का पहला फोटोग्राफिक रिकॉर्ड है। स्थानीय रूप से ‘कोल्लियान’ और ‘कट्टुमूंगा’ कहलाने वाला यह बड़ा उल्लू अपनी विशिष्ट बनावट और रात्रिचर जीवनशैली के लिए जाना जाता है।

जिले में पहली बार दर्ज हुई मौजूदगी

वन्यजीव फोटोग्राफर और पक्षी-प्रेक्षक सुनील टिटो तथा जनकिक्कड़ इकोटूरिज्म गाइड एवं पक्षी-प्रेक्षक सुधीश ए. ने उल्लू को देखा और उसकी तस्वीर ली। किसी जिले में प्रजाति का पहला फोटोग्राफिक रिकॉर्ड स्थानीय जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के लिहाज से अहम होता है। इससे क्षेत्र में पक्षियों की मौजूदगी के प्रमाण मिलते हैं और आगे के अवलोकनों के लिए आधार तैयार होता है।

जनकिक्कड़ वन कोझिकोड जिले की मरुथोंकरा पंचायत में कुट्टियाडी नदी के किनारे स्थित है। इसका क्षेत्रफल लगभग 325 एकड़ है। इस वन में 160 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं। चित्तीदार ईगल-उल्लू का यहां दर्ज होना इस क्षेत्र की पक्षी-विविधता के रिकॉर्ड में एक नया जोड़ है।

बनावट और भोजन से पहचान

इस उल्लू का वैज्ञानिक नाम Bubo nipalensis या Ketupa nipalensis है। यह पक्षियों के गण स्ट्रिगिफॉर्मीज और सामान्यतः ‘टिपिकल आउल’ कहे जाने वाले स्ट्रिगिडी कुल से संबंधित है। भारत में मिलने वाले उल्लुओं में यह आकार के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा माना जाता है। इसकी लंबाई लगभग 55 से 65 सेंटीमीटर और वजन करीब 1.5 से 2.5 किलोग्राम होता है।

आंखों के ऊपर उभरे हुए कान जैसे पंख और हल्के रंग के पेट पर बनी तीरनुमा धारियां इसकी पहचान में मदद करती हैं। यह मुख्यतः रात में सक्रिय रहता है और शिकार भी रात के समय करता है। इसके भोजन में सांप, दूसरे पक्षी और छोटे स्तनधारी शामिल हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला यह उल्लू भारत में भी मौजूद है।

वन्य आवास और पक्षी-अभिलेख का महत्व

चित्तीदार ईगल-उल्लू घने सदाबहार वनों, उष्णकटिबंधीय घाटियों और शोला वनों जैसे आवासों में मिलता है। ऐसे विशिष्ट वन-क्षेत्रों में पक्षियों का नियमित अवलोकन प्रजातियों के वितरण की जानकारी को बेहतर बनाता है। जनकिक्कड़ में इसका रिकॉर्ड स्थानीय पक्षी-अध्ययन और जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के लिए उपयोगी है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उल्लू स्ट्रिगिफॉर्मीज गण के अंतर्गत आते हैं।
  • स्ट्रिगिडी कुल को सामान्यतः ‘टिपिकल आउल’ परिवार कहा जाता है।
  • चित्तीदार ईगल-उल्लू के वैज्ञानिक नाम Bubo nipalensis और Ketupa nipalensis हैं।
  • जनकिक्कड़ वन कोझिकोड जिले में कुट्टियाडी नदी के किनारे स्थित है।

जनकिक्कड़ में हुई यह पहली फोटोग्राफिक दर्जगी केरल के इस वन क्षेत्र की पक्षी-विविधता को सामने लाती है और चित्तीदार ईगल-उल्लू के स्थानीय वितरण से जुड़ी जानकारी में योगदान देती है।

Originally written on October 17, 2026 and last modified on October 17, 2026.

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