पश्चिमी घाट में कनखजूरों की तीन नई प्रजातियां मिलीं
दक्षिण भारत में वैज्ञानिकों ने कनखजूरों के Rhysida वंश की तीन नई प्रजातियों का वर्णन किया है। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस शोध के बाद भारत में इस वंश की ज्ञात प्रजातियों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। अध्ययन में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के पश्चिमी घाट क्षेत्रीय केंद्र और मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज के शोधकर्ता शामिल थे।
संग्रहालय के नमूनों से हुई पहचान
नई प्रजातियों के नाम Rhysida quadrispinosa, Rhysida coorgensis और Rhysida neyyarensis हैं। ये नमूने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के राष्ट्रीय प्राणी संग्रह में रखे थे, लेकिन पहले उनकी पहचान नहीं हो सकी थी। शोधकर्ताओं ने सूक्ष्मदर्शी और डिजिटल कैमरों की मदद से उनके शरीर की बारीक संरचनाओं का अध्ययन किया और पहले से दर्ज प्रजातियों से तुलना की। इसके लिए उन्होंने कनखजूरों के वर्गीकरण से जुड़े ऑनलाइन डेटाबेस चिलोबेस 2.0 का भी उपयोग किया।
नामों में छिपा है प्रजातियों का परिचय
Rhysida quadrispinosa के नाम का संबंध इसकी अंतिम टांग के एक हिस्से पर मौजूद चार कांटों से है। अन्य दो प्रजातियों के नाम उनके मिलने के स्थानों पर आधारित हैं। Rhysida coorgensis का नाम कर्नाटक के कूर्ग के नाम पर रखा गया, जहां इसे पहली बार संग्रहित किया गया था। Rhysida neyyarensis का नाम केरल के नेय्यार वन्यजीव अभयारण्य से जुड़ा है, जहां यह प्रजाति मिली।
पश्चिमी घाट की जैव विविधता का नया संकेत
कनखजूरे स्थलीय संधिपाद हैं और Chilopoda वर्ग में आते हैं। इनके शरीर के प्रत्येक खंड पर एक जोड़ी पैर होती है। सिर के पास मौजूद इनके पहले उपांग विष पहुंचाने वाले फोरसिप्यूल में रूपांतरित होते हैं, जिनसे ये शिकार को पकड़ते हैं। पश्चिमी घाट कर्नाटक और केरल सहित कई राज्यों में फैली पर्वत शृंखला है। इसके जंगल और संरक्षित क्षेत्र विविध आवासों तथा स्थानिक प्रजातियों को सहारा देते हैं। यहां से नई प्रजातियों का मिलना इस क्षेत्र की जैव विविधता के दस्तावेजीकरण के महत्व को रेखांकित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कनखजूरे संधिपाद संघ के Chilopoda वर्ग के सदस्य हैं।
- फोरसिप्यूल सिर के पास मौजूद रूपांतरित उपांग हैं, जिनसे कनखजूरे विष देकर शिकार पकड़ते हैं।
- भारतीय प्राणी सर्वेक्षण की स्थापना 1916 में हुई थी और इसका मुख्यालय कोलकाता में है।
- पश्चिमी घाट को 2012 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था।
तीनों नई प्रजातियों का वर्णन भारत में Rhysida वंश की विविधता की समझ को बढ़ाता है और पश्चिमी घाट के जीव-जंतुओं के व्यवस्थित अध्ययन की जरूरत सामने लाता है।