काकीनाडा में हरित अमोनिया संयंत्र से औद्योगिक उत्सर्जन घटाने की पहल

काकीनाडा में हरित अमोनिया संयंत्र से औद्योगिक उत्सर्जन घटाने की पहल

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और जापान सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले हरित अमोनिया संयंत्र के वित्तपोषण के लिए एएम ग्रीन अमोनिया (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौते किए। इस परियोजना के तहत प्राकृतिक गैस से चलने वाले पुराने अमोनिया और यूरिया संयंत्र को स्वच्छ ऊर्जा आधारित उत्पादन सुविधा में बदला जाएगा।

हरित अमोनिया कैसे बनता है?

अमोनिया का रासायनिक सूत्र NH₃ है और इसका प्रमुख उपयोग उर्वरक बनाने में होता है। पारंपरिक उत्पादन में हाइड्रोजन बनाने के लिए सामान्यतः जीवाश्म ईंधन का उपयोग किया जाता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित होती है। इसके विपरीत, हरित अमोनिया में नवीकरणीय बिजली से पानी का विद्युत अपघटन करके हाइड्रोजन तैयार किया जाता है। हवा से अलग की गई नाइट्रोजन के साथ हाइड्रोजन को हैबर-बॉश प्रक्रिया में मिलाकर अमोनिया बनाया जाता है।

इस परियोजना में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल से अमोनिया उत्पादन से जुड़ा उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य है। अमोनिया का उपयोग यूरिया और अमोनियम नाइट्रेट जैसे उर्वरकों के अलावा रासायनिक उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी होता है। इसे हाइड्रोजन के भंडारण और परिवहन के वाहक के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्षमता और वित्तपोषण का खाका

संयंत्र की नियोजित उत्पादन क्षमता लगभग 11 लाख टन प्रतिवर्ष है। कुछ अनुमानों में पहली इकाई की क्षमता 15 लाख टन सालाना तक बताई गई है। परियोजना कई चरणों में विकसित होगी। शुरुआती वाणिज्यिक उत्पादन 2027 या 2028 में शुरू करने का लक्ष्य है, जबकि बाद के चरणों को मार्च 2030 तक चालू करने की योजना है।

वित्तपोषण में लीडिंग एशिया’स प्राइवेट इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड 2 (लीप 2) से 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर का ऋण शामिल है। जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी इस कोष को वित्त देती है और एडीबी इसका संचालन करता है। यह परियोजना मई 2026 में एडीबी और जापान की ओर से शुरू की गई दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और लचीलेपन की पहल ‘एक्सेल’ के तहत पहला निवेश है।

निर्यात समझौता और उत्सर्जन में कमी

एएम ग्रीन अमोनिया ने जर्मनी की यूनिपर ग्लोबल कमोडिटीज एसई के साथ दीर्घकालिक खरीद समझौता किया है। जनवरी 2026 में हुए इस समझौते के तहत 2028 से हर साल अधिकतम 5 लाख टन हरित अमोनिया की आपूर्ति की जा सकती है। संयंत्र पूरी क्षमता से चलने पर सालाना करीब 20 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचने का अनुमान है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अमोनिया का रासायनिक सूत्र NH₃ है और यह उर्वरक उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है।
  • विद्युत अपघटन में बिजली की मदद से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है।
  • हैबर-बॉश प्रक्रिया में हाइड्रोजन और नाइट्रोजन से अमोनिया बनाया जाता है।
  • लीप 2 को जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी वित्तपोषित करती है और एडीबी इसका संचालन करता है।

काकीनाडा की यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को उर्वरक और रासायनिक उद्योग से जोड़ती है। इसकी प्रगति भारत में औद्योगिक उत्सर्जन घटाने और हरित अमोनिया की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

Originally written on October 16, 2026 and last modified on October 16, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *