भारत की प्रजनन दर लगातार पांचवें वर्ष प्रतिस्थापन स्तर से नीचे
भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा जारी 2024 के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट में देश के जनसांख्यिकीय रुझानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर 1.9 बच्चे प्रति महिला दर्ज की गई है, जो लगातार पांचवें वर्ष प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे बनी हुई है। वहीं देश की सकल मृत्यु दर 6.4 प्रति हजार जनसंख्या दर्ज की गई, जो 2019 और 2020 के स्तर से अधिक है।
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम क्या है
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम भारत में जनसंख्या से जुड़े आंकड़ों का आकलन करने वाली एक बड़ी जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण प्रणाली है। इसके माध्यम से जन्म दर, मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और प्रजनन दर जैसे महत्वपूर्ण संकेतकों का अनुमान लगाया जाता है। इस रिपोर्ट को भारत के महापंजीयक कार्यालय द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित किया जाता है। यह प्रणाली देश की जनसंख्या संरचना और स्वास्थ्य से जुड़े रुझानों को समझने में सरकार और नीति निर्माताओं की मदद करती है।
प्रमुख जनसांख्यिकीय संकेतक
रिपोर्ट के अनुसार 2024 में सकल जन्म दर 18.3 प्रति हजार जनसंख्या रही, जबकि 2023 में यह 18.4 थी। इससे स्पष्ट है कि जन्म दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। शिशु मृत्यु दर में भी सुधार देखा गया है। वर्ष 2023 में यह दर 25 थी, जो 2024 में घटकर 24 हो गई। शहरी क्षेत्रों में मृत्यु दर 5.7 से घटकर 5.6 हो गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 6.8 पर स्थिर रही। कुल प्रजनन दर का लगातार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे रहना भविष्य में जनसंख्या वृद्धि की गति को प्रभावित कर सकता है। जनसांख्यिकी में प्रतिस्थापन स्तर 2.1 बच्चे प्रति महिला माना जाता है, जिससे एक पीढ़ी अपनी अगली पीढ़ी को संतुलित रूप से प्रतिस्थापित कर सके।
मृत्यु के कारणों में बदलाव
रिपोर्ट में मृत्यु के कारणों से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2022-24 के दौरान श्वसन संक्रमण से होने वाली मौतों की हिस्सेदारी 5.7 प्रतिशत रही, जो पहले की तुलना में अधिक है। हृदय संबंधी रोग 2024 में कुल मौतों के 32.1 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार रहे। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों का प्रतिशत 2.9 से बढ़कर 3.2 हो गया है। आत्महत्या से होने वाली मौतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2.5 प्रतिशत से बढ़कर 2.8 प्रतिशत हो गई।
लिंगानुपात में मामूली सुधार
जन्म के समय लिंगानुपात में हल्का सुधार देखा गया है। वर्ष 2022-24 के दौरान यह आंकड़ा 918 लड़कियां प्रति हजार लड़कों का रहा, जबकि 2021-23 में यह 917 था। यह संकेतक जन्म के समय लड़कियों और लड़कों के अनुपात को मापने के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि सुधार मामूली है, लेकिन यह सामाजिक जागरूकता और लिंग समानता की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन दर 2.1 बच्चे प्रति महिला मानी जाती है। ” सकल मृत्यु दर एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर होने वाली मौतों को दर्शाती है। ” शिशु मृत्यु दर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रति हजार जीवित जन्मों पर मृत्यु को मापती है। ” भारत में 2022-24 के दौरान जन्म के समय लिंगानुपात 918 लड़कियां प्रति हजार लड़कों का रहा। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट भारत की बदलती जनसंख्या संरचना और स्वास्थ्य स्थिति का महत्वपूर्ण चित्र प्रस्तुत करती है। घटती प्रजनन दर, बढ़ती जीवनशैली संबंधी बीमारियां और लिंगानुपात जैसे संकेतक आने वाले समय में नीतिगत निर्णयों के लिए अहम आधार बनेंगे।