भारत की पहली नेटवर्क्ड ऑर्बिटल डेटा सेंटर योजना से अंतरिक्ष कंप्यूटिंग को नई दिशा

भारत की पहली नेटवर्क्ड ऑर्बिटल डेटा सेंटर योजना से अंतरिक्ष कंप्यूटिंग को नई दिशा

हैदराबाद की कंपनी TakeMe2Space ने 2028 में भारत की पहली नेटवर्क्ड ऑर्बिटल डेटा सेंटर मिशन लॉन्च करने की योजना बनाई है। यह पहल अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें उपग्रहों को केवल संचार या अवलोकन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें एक वितरित कंप्यूटिंग सिस्टम की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी है।

ऑर्बिटल डेटा सेंटर क्या होता है

ऑर्बिटल डेटा सेंटर ऐसा स्पेस-बेस्ड कंप्यूटिंग सिस्टम होता है, जो कच्चा डेटा पृथ्वी पर भेजने के बजाय कक्षा में ही उसका प्रसंस्करण करता है। इससे डेटा ट्रांसफर का बोझ कम हो सकता है और कुछ कार्यों को अंतरिक्ष में ही तेज़ी से पूरा किया जा सकता है। प्रस्तावित मिशन में दो 100 किलोग्राम के MOI यानी My Orbital Infrastructure उपग्रह शामिल होंगे, जो एक नेटवर्क की तरह काम करेंगे।

इन उपग्रहों के बीच ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक का उपयोग होगा। यह लेज़र-आधारित संचार तकनीक है, जिसमें उपग्रह आपस में डेटा और कार्यभार साझा करते हैं। इस तरह का ढांचा पारंपरिक अलग-अलग काम करने वाले उपग्रहों से अलग होता है और इसे एक साझा कंप्यूटर सिस्टम की तरह डिजाइन किया जा रहा है।

मिशन की तकनीकी संरचना और लॉन्च योजना

हर उपग्रह में 10 Nvidia Thor GPU, 100 टेराबाइट स्टोरेज, एक मीटर का मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर और लगभग 1.5 किलोवाट बिजली उत्पादन क्षमता वाले पावर सिस्टम लगाए जाने की योजना है। मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर अलग-अलग तरंगदैर्घ्य में डेटा कैप्चर करता है और पृथ्वी अवलोकन जैसे कार्यों में उपयोगी होता है।

लॉन्च के लिए कंपनी ने पेरिस स्थित RIDE! space के साथ सेवा समझौता किया है। इसके तहत SpaceX Falcon 9 रॉकेट से Waymaker 2 rideshare मिशन के जरिए देर-2028 की लॉन्च विंडो हासिल की गई है। राइडशेयर मिशन में एक ही लॉन्च वाहन पर कई पेलोड भेजे जाते हैं, जिससे लागत और संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है।

कंपनी की पिछली कोशिशें और आगे की योजना

TakeMe2Space ने 30 दिसंबर 2024 को अपना MOI-TD यानी Technology Demonstrator मिशन लॉन्च किया था, जिसमें निम्न पृथ्वी कक्षा में 20 से अधिक प्रयोग किए गए। हालांकि कंपनी का MOI-1 उपग्रह जनवरी 2026 में PSLV-C62 लॉन्च विफलता के दौरान खो गया था। इसके बावजूद कंपनी ने दीर्घकालिक रूप से छह उपग्रहों का एक कॉन्स्टेलेशन बनाने की योजना बताई है।

यह मिशन भारत में अंतरिक्ष-आधारित कंप्यूटिंग, उपग्रह नेटवर्किंग और डेटा प्रोसेसिंग के नए प्रयोगों को आगे बढ़ा सकता है। खास बात यह है कि इसमें संचार, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और इमेजिंग को एक ही नेटवर्क में जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • निम्न पृथ्वी कक्षा सामान्यतः पृथ्वी की सतह से 2,000 किलोमीटर से कम ऊंचाई वाली कक्षा को कहा जाता है।
  • ऑप्टिकल इंटर-सैटेलाइट लिंक में उपग्रहों के बीच लेज़र-आधारित संचार होता है।
  • राइडशेयर मिशन में एक ही रॉकेट पर एक से अधिक पेलोड भेजे जाते हैं।
  • MOI का पूरा नाम My Orbital Infrastructure है।

अगर यह मिशन तय समय पर आगे बढ़ता है, तो यह भारत के स्पेस-टेक इकोसिस्टम में एक नई तकनीकी दिशा दिखा सकता है और अंतरिक्ष में डेटा प्रोसेसिंग की व्यावहारिक संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।

Originally written on September 28, 2026 and last modified on September 28, 2026.

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