भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु ऊर्जा एवं रक्षा सहयोग को मिली नई मजबूती
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई 2026 को वर्ष 2015 के ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते को लागू करने के लिए एक प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया। इस व्यवस्था के तहत ऑस्ट्रेलिया अब भारत को शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए यूरेनियम का निर्यात कर सकेगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, नवाचार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिससे द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिली है।
परमाणु ऊर्जा सहयोग का विस्तार
वर्ष 2015 में हस्ताक्षरित ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौता दोनों देशों के बीच यूरेनियम व्यापार के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाला यूरेनियम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों, विशेष रूप से परमाणु बिजली उत्पादन और अन्य नागरिक परमाणु उपयोगों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में यूरेनियम की नियमित आपूर्ति भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति को मजबूती प्रदान करेगी।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा में बढ़ा सहयोग
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने संयुक्त रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग घोषणा को भी अपनाया। इस घोषणा में सैन्य सहयोग, रक्षा उद्योगों के बीच साझेदारी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप लागू करने पर भी सहमति व्यक्त की, जिसके अंतर्गत समुद्री क्षेत्र की निगरानी, सूचना साझा करना और हिंद महासागर तथा व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में परिचालन समन्वय को बढ़ाया जाएगा।
महत्वपूर्ण खनिज और रक्षा नवाचार
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की भी घोषणा की। महत्वपूर्ण खनिज, जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ मृदा तत्व, बैटरियों, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के निर्माण में उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा दोनों देशों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा नवाचार कॉरिडोर की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य रक्षा प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
व्यापार और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन
इस यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलियनसुपर ने 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा की। दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिज, हरित हाइड्रोजन, स्वच्छ विनिर्माण, विमानन, परिवहन, वित्तीय सेवाओं और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) को शीघ्र अंतिम रूप देने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ईसीटीए) वर्ष 2022 से लागू है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 33.93 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते पर वर्ष 2015 में हस्ताक्षर किए गए थे।
- भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ECTA) वर्ष 2022 में लागू हुआ।
- महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) में लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ मृदा तत्व शामिल हैं।
- हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में हिंद महासागर तथा पश्चिमी और मध्य प्रशांत महासागर शामिल हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच परमाणु ऊर्जा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और आर्थिक सहयोग से जुड़े नए समझौते दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। यह सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा आधुनिकीकरण और स्वच्छ प्रौद्योगिकी विकास को गति देने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और साझा समृद्धि को भी मजबूत करेगा।