भारतीय रेलवे ने आरपीएफ कर्मियों के लिए जीपीएस युक्त बॉडी-वॉर्न कैमरे शुरू किए

भारतीय रेलवे ने आरपीएफ कर्मियों के लिए जीपीएस युक्त बॉडी-वॉर्न कैमरे शुरू किए

भारतीय रेलवे ने रेलवे सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 12 जून 2026 को पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) कर्मियों के लिए जीपीएस-सक्षम बॉडी-वॉर्न कैमरों की शुरुआत की है। इस पहल के तहत 20 नए कैमरे तैनात किए गए हैं, जिससे पहले से उपयोग में मौजूद 37 कैमरों की संख्या बढ़ गई है। इन उपकरणों का उपयोग निगरानी, यात्री सुरक्षा और आरपीएफ कर्मियों की गतिविधियों की मॉनिटरिंग के लिए किया जाएगा।

क्या हैं बॉडी-वॉर्न कैमरे?

बॉडी-वॉर्न कैमरे छोटे और पोर्टेबल रिकॉर्डिंग उपकरण होते हैं, जिन्हें सुरक्षा कर्मियों की वर्दी या विशेष हार्नेस पर लगाया जाता है। ये कैमरे ड्यूटी के दौरान होने वाली गतिविधियों, घटनाओं और बातचीत को रिकॉर्ड करते हैं। रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में इनका उपयोग आरपीएफ कर्मियों द्वारा गश्त, निरीक्षण, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा जांच के दौरान किया जाता है। इससे घटनाओं का वास्तविक रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है और जवाबदेही बढ़ती है।

कैमरों की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं

भारतीय रेलवे द्वारा उपयोग किए जा रहे इन कैमरों में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इनमें नाइट विजन तकनीक, 32 जीबी स्टोरेज क्षमता, 3000 एमएएच बैटरी और 100 से 109 डिग्री तक का वाइड-एंगल लेंस उपलब्ध है। कुछ मॉडल लगातार पांच घंटे तक वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं तथा आठ घंटे तक स्टैंडबाय मोड में कार्य कर सकते हैं। इसके अलावा सिम कार्ड आधारित कनेक्टिविटी के माध्यम से रिकॉर्ड की गई फुटेज को सीधे नियंत्रण कक्ष तक भेजा जा सकता है। नई जीपीएस सुविधा के कारण सुरक्षा कर्मियों की वास्तविक समय में लोकेशन ट्रैकिंग भी संभव हो गई है, जिससे सुरक्षा अभियानों की निगरानी और बेहतर हो सकेगी।

रेलवे सुरक्षा में उपयोगिता

बॉडी-वॉर्न कैमरे रेलवे परिसरों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनका उपयोग छेड़छाड़, चेन स्नैचिंग, महिला उत्पीड़न, मानव तस्करी और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम तथा जांच में किया जाता है। रिकॉर्ड की गई वीडियो फुटेज अदालतों में साक्ष्य के रूप में भी प्रस्तुत की जा सकती है, जिससे अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को मजबूती मिलती है।

भारतीय रेलवे में पहले भी हो चुका है उपयोग

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2020 में पहली बार आरपीएफ कर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का उपयोग शुरू किया था। इसके बाद विभिन्न रेलवे मंडलों में इनका विस्तार किया गया। मई 2025 में मैसूर रेलवे मंडल ने 20 बॉडी-वॉर्न कैमरे तैनात किए थे। इससे पहले मार्च 2023 में पूर्वी रेलवे के मालदा टाउन स्टेशन को 37 कैमरे उपलब्ध कराए गए थे। वहीं नवंबर 2021 में मध्य रेलवे के नागपुर मंडल ने 25 बॉडी-वॉर्न कैमरा प्रणालियां खरीदी थीं। समस्तीपुर मंडल में नई तैनाती भारतीय रेलवे द्वारा तकनीक आधारित सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

आरपीएफ की भूमिका

रेलवे सुरक्षा बल (Railway Protection Force – RPF) भारतीय रेल मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला सुरक्षा बल है। इसका मुख्य दायित्व रेलवे संपत्ति, यात्रियों और रेल संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आरपीएफ देशभर के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रेलवे सुरक्षा बल (RPF) रेल मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला सुरक्षा बल है।
  • बॉडी-वॉर्न कैमरे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा कार्यों के दौरान घटनाओं की रिकॉर्डिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • भारतीय रेलवे ने वर्ष 2020 में पहली बार आरपीएफ कर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का उपयोग शुरू किया था।
  • रिकॉर्ड की गई फुटेज को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • जीपीएस-सक्षम कैमरे सुरक्षा कर्मियों की वास्तविक समय में लोकेशन ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करते हैं।
  • समस्तीपुर मंडल पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत आता है।

भारतीय रेलवे द्वारा जीपीएस युक्त बॉडी-वॉर्न कैमरों की तैनाती रेलवे सुरक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होगी, बल्कि आरपीएफ कर्मियों की जवाबदेही और कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। आधुनिक तकनीक के उपयोग से रेलवे परिसर और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

Originally written on June 13, 2026 and last modified on June 13, 2026.

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