भारतीय मरीजों के लिए सिकल सेल गंभीरता आकलन में नई पहल

भारतीय मरीजों के लिए सिकल सेल गंभीरता आकलन में नई पहल

सीएसआईआर–सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों ने सिकल सेल एनीमिया की गंभीरता का आकलन करने के लिए भारत-विशिष्ट स्कोर विकसित किया है। यह मॉडल भारतीय बच्चों के नैदानिक डेटा पर आधारित है और देश में इस रोग की अलग प्रकृति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

भारत के मरीजों के लिए अलग मॉडल क्यों जरूरी था

सिकल सेल एनीमिया एक वंशानुगत रक्त विकार है, जिसमें हीमोग्लोबिन की संरचना असामान्य होती है। इसे हीमोग्लोबिनोपैथी की श्रेणी में रखा जाता है। इस बीमारी में खून की कमी, दर्द के दौरे और अंगों से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अलग-अलग आबादियों में इसके लक्षण और गंभीरता का पैटर्न बदलता है, इसलिए विदेशों में बने स्कोर भारतीय मरीजों पर पूरी तरह सटीक नहीं बैठते।

ISS1 और ISS2 से कैसे बदली आकलन की प्रक्रिया

नए मॉडल का नाम ISS1 रखा गया है, जिसका पूरा नाम India-specific Severity Score है। इसे नागपुर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज करा रहे 18 वर्ष तक के 171 भारतीय बच्चों के क्लिनिकल डेटा से तैयार किया गया। इस मॉडल ने नैदानिक आकलन की सटीकता लगभग 83 प्रतिशत तक पहुंचाई।

इसके बाद विकसित ISS2 संस्करण में प्रयोगशाला जांच के बजाय केवल दिखाई देने वाले नैदानिक संकेतों को आधार बनाया गया। इसने लगभग 85 प्रतिशत सहमति दिखाई और हल्के वर्ग के सभी मरीजों की सही पहचान की। इसका बड़ा लाभ यह है कि डॉक्टर बिना विस्तृत लैब जांच के भी मरीज की स्थिति का आकलन कर सकते हैं।

विदेशी स्कोर से कितना अलग है भारतीय अनुभव

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाला Paediatric Severity Score (PSS) भारत के बाहर के मरीजों के डेटा पर आधारित है। भारतीय अध्ययन में यह विशेषज्ञों के नैदानिक आकलन से लगभग 67 प्रतिशत मामलों में ही मेल खा सका। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय मरीजों की बीमारी की प्रकृति अफ्रीकी और पश्चिमी आबादियों से अलग हो सकती है। इसी अंतर को ध्यान में रखकर देश-विशिष्ट स्कोर की जरूरत महसूस की गई।

मिशन से जुड़ी व्यापक उपयोगिता

यह विकास CSIR-Sickle Cell Anaemia Mission का हिस्सा है। इस मिशन में एक किफायती PCR-आधारित आणविक परीक्षण भी शामिल है, जिसे CSIR-CCMB ने विकसित किया और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने सत्यापित किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस परीक्षण में 100 प्रतिशत संवेदनशीलता और विशिष्टता दर्ज की गई।

सिकल सेल रोग के उपचार में Hydroxyurea जैसी दवाओं का उपयोग भी किया जाता है, जो जटिलताओं को कम करने में मदद करती हैं। हालांकि, नए स्कोरिंग टूल की व्यापक उपयोगिता के लिए बड़े और अधिक विविध समूहों में आगे सत्यापन जरूरी होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल समान आनुवंशिक और स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले अन्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CSIR-CCMB, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के तहत काम करने वाली एक प्रमुख प्रयोगशाला है।
  • सिकल सेल एनीमिया एक हीमोग्लोबिनोपैथी है, यानी हीमोग्लोबिन से जुड़ा आनुवंशिक रक्त विकार।
  • ISS1 और ISS2 भारत-विशिष्ट गंभीरता आकलन उपकरण हैं, जिन्हें सिकल सेल एनीमिया के लिए विकसित किया गया है।
  • Hydroxyurea सिकल सेल रोग में जटिलताएं कम करने और प्रबंधन में मदद करने वाली दवा है।

यह पहल भारत में सिकल सेल रोग के अधिक सटीक, व्यावहारिक और मरीज-केंद्रित प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Originally written on October 3, 2026 and last modified on October 3, 2026.

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