भारतीय नौसेना के लिए नई मिसाइल वेसल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

भारतीय नौसेना के लिए नई मिसाइल वेसल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने 18 सितंबर 2026 को भारतीय नौसेना के लिए बनने वाले छह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स में से पहले जहाज की कील रखी। कोच्चि में हुए इस समारोह को इंटीग्रेटेड हेडक्वार्टर, भारतीय नौसेना के कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन वाइस एडमिरल संजय साधु ने संपन्न कराया। यह कदम भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता और नौसैनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम प्रगति माना जा रहा है।

क्या हैं नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स

ये जहाज उच्च गति वाले नौसैनिक प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किए जा रहे हैं। इनकी अधिकतम गति 33 नॉट्स तक होगी और इनमें 80 कर्मियों का दल रहेगा। इनका डिजाइन आक्रामक और रक्षात्मक, दोनों तरह की भूमिकाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। ये दुश्मन के युद्धपोतों, व्यापारी जहाजों और तटीय/स्थलीय लक्ष्यों पर कार्रवाई करने में सक्षम होंगे, साथ ही स्थानीय नौसैनिक अभियानों और समुद्री रक्षा में भी उपयोगी रहेंगे।

हथियार और सेंसर क्षमता

इन वेसल्स में सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, मिसाइल-रोधी रक्षा प्रणाली, वायु निगरानी प्रणाली और फायर कंट्रोल रडार लगाए जाएंगे। इस वजह से यह श्रेणी भारतीय नौसेना के उन सतही युद्धपोतों में शामिल होगी, जिनमें हथियारों की घनता और मारक क्षमता अधिक होगी। ऐसे प्लेटफॉर्म समुद्री क्षेत्र में त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक हमले की क्षमता बढ़ाते हैं।

परियोजना की समय-सीमा और महत्व

भारतीय नौसेना ने 30 मार्च 2023 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के साथ छह नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स के लिए लगभग 9,805 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। पहले जहाज BY-531 के लिए स्टील कटिंग दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी और इसके मार्च 2027 से डिलीवर होने की योजना है। इस परियोजना के दूसरे जहाज की स्टील कटिंग 17 सितंबर 2026 को कोच्चि में की गई। कील-लेइंग को जहाज निर्माण का एक प्रमुख चरण माना जाता है, क्योंकि इससे हुल निर्माण की औपचारिक शुरुआत होती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कील-लेइंग जहाज निर्माण का वह चरण है, जब पोत के ढांचे का औपचारिक निर्माण शुरू माना जाता है।
  • कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का मुख्यालय कोच्चि, केरल में है और यह भारत के प्रमुख शिपयार्ड्स में शामिल है।
  • भारतीय नौसेना में मिसाइल वेसल्स का उपयोग सतही युद्ध और तटीय रक्षा जैसे कार्यों में किया जाता है।
  • यह परियोजना रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देती है।

नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स परियोजना भारतीय नौसेना की मारक क्षमता, तटीय सुरक्षा और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण को नई मजबूती देगी। यह कार्यक्रम भारत के समुद्री रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Originally written on September 19, 2026 and last modified on September 19, 2026.

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