एशियन गेम्स 2026 में भारत की ध्वजवाहक जिम्मेदारी पवन सेहरावत को
एशियन गेम्स 2026 के उद्घाटन समारोह में भारत के पुरुष ध्वजवाहक की जिम्मेदारी कबड्डी खिलाड़ी पवन सेहरावत को सौंपी गई है। यह समारोह 19 सितंबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में होगा। पहले यह भूमिका शॉट पुटर तजिंदरपाल सिंह तूर को दी गई थी, लेकिन अब पवन सेहरावत भारत के पुरुष ध्वजवाहक होंगे, जबकि निशानेबाज मनु भाकर महिला ध्वजवाहक बनी रहेंगी।
क्यों अहम है यह चयन
ध्वजवाहक का चयन केवल औपचारिक जिम्मेदारी नहीं होता, बल्कि यह किसी खिलाड़ी की उपलब्धियों और टीम में उसकी प्रतिष्ठा का भी प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर ऐसे खिलाड़ी चुने जाते हैं जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन मजबूत रहा हो या जिन्होंने देश को बड़े मंचों पर पदक दिलाए हों। पवन सेहरावत का चयन इसी कड़ी में देखा जा रहा है, क्योंकि वे भारतीय कबड्डी टीम के अनुभवी और प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हैं।
पवन सेहरावत और कबड्डी की भूमिका
पवन सेहरावत पिछली एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का हिस्सा रहे हैं। कबड्डी भारत के लिए एशियन गेम्स में लगातार पदक दिलाने वाला खेल रहा है और पुरुष टीम ने इस प्रतियोगिता के इतिहास में कई बार स्वर्ण पदक जीते हैं। ऐसे में पवन का ध्वजवाहक बनना भारतीय कबड्डी की मजबूत परंपरा को भी दर्शाता है।
एशियन गेम्स में कबड्डी भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। यह खेल 1990 में एशियन गेम्स में पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया था, और तब से भारतीय टीम ने इसमें लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है।
एशियन गेम्स 2026 से जुड़ी प्रमुख बातें
एशियन गेम्स एशिया का सबसे बड़ा बहु-खेल आयोजन है, जिसे ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया आयोजित करती है। यह प्रतियोगिता हर चार साल में होती है और इसमें महाद्वीप के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। भारत ने 1951 में पहली एशियन गेम्स से ही इस आयोजन में भाग लेना शुरू किया था।
इस बार उद्घाटन समारोह के लिए आइची-नागोया को मेजबान क्षेत्र चुना गया है। तजिंदरपाल सिंह तूर के औपचारिक किट के नागोया हवाई अड्डे पर दोपहर 3 बजे पहुंचने की संभावना के कारण उनकी उपलब्धता प्रभावित हुई, जिसके बाद ध्वजवाहक की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एशियन गेम्स एशिया का सबसे बड़ा बहु-खेल आयोजन है और इसका संचालन ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया करती है।
- यह प्रतियोगिता हर चार साल में आयोजित होती है।
- कबड्डी को एशियन गेम्स में 1990 से पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया।
- भारत ने 1951 में पहली एशियन गेम्स से इस आयोजन में भाग लेना शुरू किया था।
पवन सेहरावत का ध्वजवाहक बनना भारतीय खेलों में कबड्डी की प्रतिष्ठा और एशियन गेम्स में भारत की मजबूत उपस्थिति का संकेत है। मनु भाकर के साथ यह चयन भारतीय दल के लिए सम्मान और अनुभव, दोनों का संतुलन दिखाता है।