कर्नाटक की नई मरीन बायोटेक नीति से ब्लू इकॉनमी को रफ्तार
कर्नाटक ने समुद्री संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए 2026-2031 की पांच वर्षीय मरीन बायोटेक्नोलॉजी नीति को मंजूरी दी है। 18 सितंबर 2026 को स्वीकृत इस नीति का लक्ष्य राज्य की ब्लू बायोइकॉनमी का विस्तार करना, समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना और कर्नाटक तट पर संस्थागत तथा औद्योगिक ढांचा विकसित करना है।
ब्लू बायोइकॉनमी पर केंद्रित रणनीति
मरीन बायोटेक्नोलॉजी का उपयोग समुद्री जीवों, समुद्री आनुवंशिक संसाधनों और महासागरीय जैविक प्रक्रियाओं से उत्पाद और सेवाएं विकसित करने में होता है। वहीं ब्लू बायोइकॉनमी का अर्थ है समुद्री और तटीय संसाधनों का टिकाऊ उपयोग कर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाना। इसमें मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल, समुद्री जैव-सामग्री और बायोमैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
कर्नाटक की नई नीति के तहत ब्लू बायोइकॉनमी को लगभग 2 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2031 तक 6 से 8 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पांच वर्षों में 120 करोड़ रुपये के व्यय का प्रस्ताव है।
संस्थान, प्रयोगशालाएं और औद्योगिक ढांचा
नीति के तहत सरकारी मत्स्य महाविद्यालय में कर्नाटक इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन बायोटेक्नोलॉजी एंड ब्लू इकॉनमी स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही उडुपी में प्रयोगशालाएं, बायोबैंक और इनक्यूबेशन सेंटर विकसित करने की योजना है।
मत्स्य विभाग के सहयोग से डेडिकेटेड मरीन बायोटेक्नोलॉजी जोन भी प्रस्तावित हैं। इन जोनों में शोध और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए साझा आधारभूत संरचना और परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नीति में समुद्री अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, व्यावसायीकरण, समुद्री शैवाल प्रसंस्करण, समुद्री जैव-सामग्री और टिकाऊ समुद्री उद्यमों को भी शामिल किया गया है।
रोजगार और अनुसंधान क्षमता को बढ़ावा
यह नीति राज्य में पहले से मौजूद शैक्षणिक और अनुसंधान आधार पर आगे बढ़ेगी। इसमें मंगलुरु के कॉलेज ऑफ फिशरीज, धारवाड़ की कर्नाटक यूनिवर्सिटी और एनआईटीटीई के मरीन बायोटेक्नोलॉजी कार्यक्रमों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सरकार का अनुमान है कि इस पहल से लगभग 2,500 उच्च-मूल्य तकनीकी नौकरियां और 7,500 तटीय उद्यम एवं आजीविका अवसर पैदा होंगे। समुद्री शैवाल के लिए सीवीड वैल्यू एडिशन प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी SVA-PLI भी नीति का हिस्सा है, जिससे उच्च-मूल्य उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मरीन बायोटेक्नोलॉजी समुद्री जीवों और समुद्री जैव संसाधनों के औद्योगिक, औषधीय और पर्यावरणीय उपयोग से जुड़ी शाखा है।
- ब्लू इकॉनमी का संबंध समुद्री संसाधनों के टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी उपयोग से है।
- समुद्री शैवाल का उपयोग खाद्य पदार्थों, उर्वरकों, दवाओं और जैव-सामग्री में होता है।
- पीएलआई योजनाएं भारत में चयनित क्षेत्रों में उत्पादन और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए लागू की जाती हैं।
कर्नाटक की यह नीति समुद्री विज्ञान, तटीय उद्यमिता और औद्योगिक नवाचार को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। राज्य की लंबी समुद्री तटरेखा और पहले से मौजूद शोध संस्थान इस पहल को और मजबूत आधार दे सकते हैं।