ब्रिक्स विदेश मंत्रियों ने फिलिस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र के समर्थन को दोहराया
नई दिल्ली में 15 मई 2026 को आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में फिलिस्तीन के स्वतंत्र और व्यवहार्य राष्ट्र के समर्थन को फिर से दोहराया गया। बैठक में कहा गया कि फिलिस्तीन को 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो। इस बैठक में गाजा पट्टी को “अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र” का हिस्सा बताया गया और दो-राष्ट्र समाधान को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप आवश्यक माना गया।
ब्रिक्स और पश्चिम एशिया कूटनीति
ब्रिक्स विश्व की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतर-सरकारी समूह है। इसकी स्थापना ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका द्वारा की गई थी। हाल के वर्षों में इस समूह का विस्तार भी हुआ है और नए सदस्य इसमें शामिल किए गए हैं। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। नई दिल्ली में हुई बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति और विशेष रूप से इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष प्रमुख विषयों में शामिल रहे।
क्या है दो-राष्ट्र समाधान?
दो-राष्ट्र समाधान का अर्थ ऐतिहासिक फिलिस्तीन क्षेत्र में दो स्वतंत्र देशों—इजरायल और फिलिस्तीन—की स्थापना से है। इसमें 1967 से पहले की सीमाओं को आधार माना जाता है, जिन्हें 1949 की युद्धविराम रेखाएं या “ग्रीन लाइन” भी कहा जाता है। पूर्वी यरुशलम फिलिस्तीनियों द्वारा अपने भावी राष्ट्र की राजधानी के रूप में दावा किया जाता है। यह क्षेत्र इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक माना जाता है। फिलिस्तीनी प्राधिकरण की स्थापना 1990 के दशक में ओस्लो समझौतों के बाद हुई थी और यह वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों का प्रशासन संभालता है।
नई दिल्ली बैठक के प्रमुख बिंदु
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों ने गाजा पट्टी में तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की। साथ ही इजरायली सेनाओं की पूर्ण वापसी, बंधकों की रिहाई और मानवीय सहायता को बिना बाधा पहुंचाने का समर्थन किया गया। बैठक में संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को पूर्ण सदस्यता देने की मांग का भी समर्थन किया गया। हालांकि सदस्य देशों के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर अलग-अलग विचार होने के कारण कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया। बताया गया कि एक ब्रिक्स सदस्य ने भारत की अध्यक्षीय टिप्पणी में शामिल गाजा संबंधी कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी।
गाजा पट्टी और फिलिस्तीनी क्षेत्र
वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी फिलिस्तीन के दो मुख्य क्षेत्र हैं। वर्ष 2007 से गाजा पट्टी लगातार नाकेबंदी, संघर्ष और मानवीय संकट का सामना कर रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से इस क्षेत्र में स्थायी शांति और समाधान की मांग करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2012 में फिलिस्तीन को गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा प्रदान किया था, लेकिन उसे अब तक पूर्ण सदस्यता नहीं मिली है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 1967 से पहले की सीमाओं को “ग्रीन लाइन” या 1949 आर्मिस्टिस लाइन भी कहा जाता है।
- पूर्वी यरुशलम इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का सबसे संवेदनशील मुद्दा माना जाता है।
- फिलिस्तीनी प्राधिकरण की स्थापना 1993 और 1995 के ओस्लो समझौतों के बाद हुई थी।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में फिलिस्तीन को गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्जा दिया था।
नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन मुद्दा अब भी वैश्विक कूटनीति का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। दो-राष्ट्र समाधान और स्थायी शांति की दिशा में वैश्विक सहमति बनाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।