बुलावा मिसाइल परीक्षण से रूस की समुद्री परमाणु क्षमता का प्रदर्शन

बुलावा मिसाइल परीक्षण से रूस की समुद्री परमाणु क्षमता का प्रदर्शन

रूस ने 28 अक्टूबर 2026 को ओखोत्स्क सागर में पानी के भीतर मौजूद परमाणु-संचालित पनडुब्बी से बुलावा अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल के युद्धक हिस्से निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचे। यह परीक्षण रूस की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को प्रदर्शित करने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण है।

पनडुब्बी से किया गया परीक्षण

मिसाइल को प्रोजेक्ट 955ए बोरेई-ए श्रेणी की पनडुब्बी ‘जनरलिसिमो सुवोरोव’ से दागा गया। यह पनडुब्बी दिसंबर 2022 में रूसी नौसेना में शामिल हुई थी और इसमें अधिकतम 16 बुलावा मिसाइलें ले जाने की क्षमता है। प्रक्षेपण ओखोत्स्क सागर में जलमग्न अवस्था से किया गया, जबकि मिसाइल का लक्ष्य आर्कान्जेल्स्क क्षेत्र के चिझा परीक्षण क्षेत्र में बताया गया। इस क्षेत्र का उल्लेख केप कानिन के नाम से भी किया जाता है।

रूसी रक्षा मंत्रालय ने प्रक्षेपण को सफल बताते हुए इसे नियमित युद्धक प्रशिक्षण का हिस्सा कहा। हालांकि, परीक्षण और लक्ष्य पर वारहेड पहुँचने के दावे की अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए परिणामों से जुड़ी जानकारी को रूसी पक्ष के आधिकारिक दावे के रूप में देखना चाहिए।

बुलावा मिसाइल की प्रमुख क्षमताएँ

बुलावा, जिसे आरएसएम-56 भी कहा जाता है, परमाणु क्षमता वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक दूरी 8,000 किलोमीटर से अधिक बताई गई है और यह एक से अधिक परमाणु वारहेड ले जा सकती है। इसकी लंबी दूरी रूस को समुद्र में तैनात पनडुब्बियों से दूर स्थित लक्ष्यों तक पहुँचने की क्षमता देती है।

मिसाइल को झुकी हुई स्थिति से दागा जा सकता है। इससे पनडुब्बी के चलते रहने के दौरान भी प्रक्षेपण संभव होता है। पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली मिसाइलों की रणनीतिक उपयोगिता इस बात में है कि वे समुद्र में छिपी रह सकती हैं और किसी शुरुआती हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनाए रख सकती हैं। इसे परमाणु रणनीति में ‘दूसरे प्रहार’ की क्षमता कहा जाता है।

रूस की परमाणु प्रतिरोधक रणनीति में भूमिका

परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का उद्देश्य संभावित विरोधी को यह संकेत देना है कि हमला करने पर जवाबी कार्रवाई संभव होगी। भूमि, वायु और समुद्र से संचालित परमाणु प्रणालियाँ इस रणनीति के अलग-अलग आधार बनाती हैं। पनडुब्बियों की समुद्री तैनाती विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि उनकी स्थिति का पता लगाना कठिन हो सकता है। रूस ने इस परीक्षण को अपनी ऐसी ही जवाबी क्षमता के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत किया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • बुलावा मिसाइल की मारक दूरी 8,000 किलोमीटर से अधिक बताई गई है और यह कई परमाणु वारहेड ले जा सकती है।
  • बुलावा में तीन चरण हैं; पहले दो ठोस ईंधन से और तीसरा तरल ईंधन से संचालित होता है।
  • बोरेई श्रेणी की पनडुब्बियों में पंप-जेट प्रणोदन प्रणाली दी गई है, जिसका उद्देश्य शोर कम करना है।
  • प्रोजेक्ट 955ए की पनडुब्बियों में गतिशीलता बेहतर करने के लिए सभी दिशाओं में घूमने वाले पतवार और ऊर्ध्वाधर जल-नियंत्रक सतहों में बदलाव किए गए हैं।

बुलावा का यह परीक्षण रूस की समुद्र-आधारित परमाणु क्षमता और पनडुब्बी बेड़े की भूमिका को रेखांकित करता है। इसके परिणामों पर उपलब्ध जानकारी फिलहाल रूसी रक्षा मंत्रालय के दावों पर आधारित है।

Originally written on October 31, 2026 and last modified on October 31, 2026.

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