बिना नौकरी वालों को भी मिलेगी पेंशन: सरकार का नया पीएफ मास्टरप्लान
भारत में नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ (PF) हमेशा से बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा रहा है। लेकिन देश की एक बहुत बड़ी आबादी ऐसी है जो किसी कंपनी में बंधी-बंधाई सैलरी पर काम नहीं करती। छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, ओला-उबर के ड्राइवर, जोमैटो-स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स, डॉक्टर, सीए और अपने दम पर बिजनेस करने वाले आत्मनिर्भर लोग इस दायरे से हमेशा बाहर रहे हैं। अब केंद्र सरकार इस व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। सोशल सिक्योरिटी कोड (सामाजिक सुरक्षा संहिता) के तहत सरकार एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है, जिसके जरिए देश के करोड़ों सेल्फ-एंप्लॉयड (खुद का काम करने वाले) और गिग वर्कर्स को भी पीएफ और पेंशन के दायरे में लाया जाएगा। यह भारत के इतिहास में असंगठित क्षेत्र के लिए उठाया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा कदम माना जा रहा है।
क्या है सरकार का यह नया पीएफ मॉडल?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक ऐसा नया फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है जो पारंपरिक सैलरी क्लास पीएफ से काफी अलग होगा। अभी तक का नियम यह है कि जिस कंपनी में 20 से ज्यादा कर्मचारी होते हैं, वहां पीएफ काटना अनिवार्य होता है। इसमें 12% कर्मचारी की सैलरी से कटता है और 12% कंपनी मिलाती है। लेकिन किसी फ्रीलांसर या दुकानदार का तो कोई बॉस होता नहीं, इसलिए उनके लिए यह ढांचा काम नहीं कर सकता था। नए मॉडल को पूरी तरह से ‘सेल्फ-फाइनेंसिंग’ यानी खुद के योगदान पर आधारित बनाया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि इसमें सरकार अपनी तरफ से कोई बजटरी सपोर्ट (आर्थिक मदद) नहीं देगी, बल्कि लोग खुद अपनी कमाई का एक हिस्सा इसमें जमा करेंगे। सरकार की कोशिश एक ऐसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की है, जिसमें कोई भी आम नागरिक आसानी से जुड़ सके और अपने भविष्य को सुरक्षित कर सके।

कमाई फिक्स नहीं, तो पीएफ कैसे जमा होगा?
एक आम दुकानदार या फ्रीलांसर की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि उसकी हर महीने की कमाई एक जैसी नहीं होती। किसी महीने त्योहारों पर बंपर बिक्री होती है, तो किसी महीने धंधा बिल्कुल मंदा रहता है। सरकार ने इस जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए इस योजना में ‘फ्लेक्सिबल कंट्रीब्यूशन’ (लचीले योगदान) का विकल्प शामिल करने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत सब्सक्राइबर्स को रोज, हर महीने या फिर साल में एक बार अपनी सुविधा के अनुसार पैसा जमा करने की छूट होगी। अगर किसी महीने आपकी कमाई अच्छी हुई है, तो आप ज्यादा पैसा डाल सकते हैं, और मंदी के समय योगदान को कम या कुछ समय के लिए रोका भी जा सकता है। आपका अंतिम पीएफ कॉर्पस (कुल फंड) और भविष्य में मिलने वाली पेंशन इस बात पर तय होगी कि आपने अपने पूरे करियर में कुल कितना पैसा जमा किया है।

टैक्स में छूट और बेहतर रिटर्न का फायदा
सरकार इस स्कीम को पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी मौजूदा योजनाओं से ज्यादा आकर्षक बनाना चाहती है। ईपीएफओ (EPFO) के इस नए मॉडल में जमा होने वाले पैसे पर सालाना बेहतरीन ब्याज तो मिलेगा ही, साथ ही टैक्स में भी बड़ी राहत देने का प्रस्ताव है। शुरुआती ब्लूप्रिंट के अनुसार, इस योजना में साल भर में 2.5 लाख रुपये तक के योगदान को पूरी तरह से टैक्स फ्री रखा जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं, इस फंड पर जो सालाना ब्याज मिलेगा, उस पर भी कोई टैक्स नहीं लगेगा। यह उन मध्यमवर्गीय व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी राहत होगी जो टैक्स बचाने के लिए सुरक्षित और बेहतर रिटर्न वाले विकल्पों की तलाश में रहते हैं।
रिटायरमेंट के बाद पैसा निकालने का नया फॉर्मूला
पारंपरिक पीएफ में अक्सर देखा गया है कि लोग नौकरी बदलते समय या रिटायरमेंट के वक्त पूरा पैसा एक साथ निकाल लेते हैं। लेकिन सेल्फ-एंप्लॉयड स्कीम के लिए सरकार ‘सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान’ (SWP) यानी व्यवस्थित निकासी तंत्र लाने जा रही है। इस नए नियम के तहत, रिटायरमेंट की उम्र पार करने के बाद भी खाताधारकों को अपना पूरा पैसा ईपीएफओ के पास ही बनाए रखने की सुविधा मिलेगी। वे खुद यह तय कर सकेंगे कि उन्हें हर महीने कितनी पेंशन या रेगुलर इनकम चाहिए। इसPayout (भुगतान) को अपनी जरूरत के हिसाब से शुरुआत में ज्यादा और बाद में कम (फ्रंट-लोडेड) या फिर शुरुआत में कम और बाद में ज्यादा (बैक-एंडेड) सेट किया जा सकेगा। इस मॉडल को तैयार करने के लिए भारत सरकार ने सिंगापुर जैसे विकसित देशों के सोशल सिक्योरिटी मॉडल्स का गहराई से अध्ययन किया है।
गिग वर्कर्स और ऐप आधारित चालकों के लिए खास नियम
आज के दौर में जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, ओला और उबर जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले लाखों युवाओं (जिन्हें गिग या प्लेटफॉर्म वर्कर्स कहा जाता है) की सामाजिक सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रही है। नए सोशल सिक्योरिटी कोड के सेक्शन 114(4) में इनके लिए एक विशेष प्रावधान किया गया है। अब इन ऐप-आधारित एग्रीगेटर कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने सालाना टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत हिस्सा एक नए सोशल सिक्योरिटी वेलफेयर फंड में योगदान करें। इसी फंड के जरिए इन डिलीवरी पार्टनर्स और ड्राइवरों के पीएफ, पेंशन और स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था ईपीएफओ द्वारा संभाली जाएगी। इससे कंपनियों पर बहुत ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ेगा और जमीन पर काम करने वाले लाखों युवाओं को एक मजबूत सुरक्षा कवच मिल जाएगा।
भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव
भारत इस समय वैश्विक स्तर पर अपनी सामाजिक सुरक्षा नीतियों को तेजी से मजबूत कर रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में सोशल प्रोटेक्शन कवरेज 2015 के 19% से बढ़कर 2025 तक 64.3% तक पहुंच चुका है, जिससे भारत दुनिया में इस मामले में दूसरे स्थान पर आ गया है। इस नए पीएफ कानून के लागू होने के बाद भारत की एक बहुत बड़ी आबादी, जो अब तक बुढ़ापे की अनिश्चितताओं से डरती थी, गर्व से अपने पैरों पर खड़ी हो सकेगी। देश के करोड़ों स्वरोजगारी, छोटे दुकानदार और डिजिटल युग के फ्रीलांसर्स के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं होगी। यह कदम न केवल उनके भविष्य को वित्तीय रूप से सुरक्षित करेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में असंगठित कार्यबल को एक औपचारिक और मजबूत पहचान भी देगा।