प्रोजेक्ट ब्रह्मांक: अरुणाचल प्रदेश में सामरिक सड़क संपर्क का मजबूत आधार
अरुणाचल प्रदेश में सीमा क्षेत्रों के विकास और सामरिक संपर्क को मजबूत बनाने में प्रोजेक्ट ब्रह्मांक (BRAHMANK) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की इस परियोजना को दिसंबर 2011 में औपचारिक रूप से कमीशन किया गया था। 29 जून 2026 को इस परियोजना ने अरुणाचल प्रदेश के राणाघाट में अपना 16वां स्थापना दिवस (रेजिंग डे) मनाया। कठिन पर्वतीय भूभाग और प्रतिकूल मौसम के बावजूद यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास के माध्यम से रणनीतिक संपर्क को लगातार सुदृढ़ कर रही है।
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक का परिचय
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के अंतर्गत 811 किलोमीटर सड़कों तथा लगभग 86 पुलों का विकास और रखरखाव किया जाता है। इसका कार्यक्षेत्र अरुणाचल प्रदेश के सियांग, ईस्ट सियांग, वेस्ट सियांग, अपर सियांग और शी-योमी जिलों के साथ-साथ असम के धीमाजी जिले के कुछ हिस्सों तक फैला हुआ है। यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिक और सामरिक दोनों प्रकार की आवाजाही को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
सड़क और पुल निर्माण में उल्लेखनीय उपलब्धियां
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रोजेक्ट ब्रह्मांक ने सियांग और सियोम घाटियों में 390 मीटर की कुल लंबाई वाले 13 पुलों का निर्माण पूरा किया। इसी अवधि में 61 किलोमीटर सड़कों को नेशनल हाईवे डबल लेन (एनएचडीएल) मानकों के अनुरूप ब्लैकटॉप किया गया। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने के लिए परियोजना के तहत कई हेलिपैड भी विकसित किए गए हैं, जो आपातकालीन सेवाओं और रसद संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
चुनौतीपूर्ण भूभाग में आधुनिक इंजीनियरिंग
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक के अंतर्गत कई अत्याधुनिक संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें सियोम नल्लाह पर निर्मित 100 मीटर लंबा स्टील आर्च पुल तथा अलोंग–यिंगकियांग मार्ग पर सिमांग नल्लाह के ऊपर बना 165 मीटर लंबा प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुल प्रमुख हैं। ये संरचनाएं कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षित एवं निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करती हैं।
सामरिक महत्व और सीमा संपर्क
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिलों और पड़ोसी असम के क्षेत्रों में सड़क संपर्क को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बेहतर सड़क और पुल नेटवर्क से रक्षा बलों की आवाजाही, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, आपदा राहत कार्य और स्थानीय नागरिकों की दैनिक आवाजाही अधिक सुगम होती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद यह परियोजना सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में निरंतर योगदान दे रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी और यह रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- अरुणाचल प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं भूटान, चीन और म्यांमार से लगती हैं।
- नेशनल हाईवे डबल लेन (एनएचडीएल) दो-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का मानक है।
- दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में हेलिपैड का निर्माण रसद, आपातकालीन सहायता और त्वरित आवागमन के लिए किया जाता है।
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। सड़क, पुल और हवाई संपर्क सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से यह परियोजना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि स्थानीय विकास, आपदा प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।