प्रकाश से डेटा लिखने की तेज तकनीक की ओर यूसी सैन डिएगो की पहल

प्रकाश से डेटा लिखने की तेज तकनीक की ओर यूसी सैन डिएगो की पहल

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन डिएगो के शोधकर्ताओं ने प्रकाश की मदद से चुंबकीय अवस्था बदलकर डिजिटल जानकारी लिखने की एक विधि प्रदर्शित की है। 27 अक्टूबर 2026 को घोषित इस शोध में आकार और ऊर्जा के लिहाज से नियंत्रित अति-तीव्र लेजर किरण का उपयोग किया गया। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह तरीका पारंपरिक चुंबकीय स्विचिंग से 1,000 गुना से भी अधिक तेज हो सकता है। यह प्रयोगशाला में प्रदर्शित तकनीक है; इससे अभी व्यावसायिक मेमोरी उपकरण उपलब्ध होने का निष्कर्ष नहीं निकलता।

चुंबकीय डेटा लेखन में प्रकाश की भूमिका

चुंबकीय भंडारण प्रणालियों में जानकारी बहुत छोटे चुंबकीय क्षेत्रों में दर्ज होती है। इन क्षेत्रों की चुंबकीय दिशाओं को अलग-अलग करके डिजिटल डेटा के मान दर्शाए जाते हैं। पारंपरिक तरीकों में चुंबकीय दिशा बदलने के लिए बाहरी चुंबकीय क्षेत्र का इस्तेमाल किया जा सकता है। नई विधि में लेजर की छोटी पल्स से चुंबकीय पदार्थ की अवस्था बदली जाती है, इसलिए इस प्रक्रिया के लिए बाहरी चुंबकीय क्षेत्र की जरूरत नहीं पड़ती।

प्रकाश को बेहद कम समय की पल्स के रूप में भेजा और छोटे हिस्से पर केंद्रित किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने किरण के आकार और फैलाव को नियंत्रित कर उसकी ऊर्जा चुंबकीय पदार्थ के सीमित क्षेत्र तक पहुंचाई। इससे डेटा लिखने की प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर संचालित करने की संभावना सामने आती है।

अति-तीव्र लेजर से चुंबकीय दिशा में बदलाव

प्रदर्शित प्रक्रिया में शुरुआती लेजर पल्स पदार्थ के एक छोटे हिस्से को कुछ समय के लिए गर्म करती हैं और चुंबकीय दिशा के पलटने की शुरुआत करती हैं। इसके बाद आने वाली पल्स उलटी चुंबकीय अवस्था वाले क्षेत्र को फैलाती हैं, जब तक कि नई अवस्था स्थिर न हो जाए। शोध में किसी नए चुंबकीय पदार्थ के निर्माण के बजाय मौजूदा पदार्थ के साथ प्रकाश की अंतःक्रिया को नियंत्रित किया गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस विधि की संभावित स्विचिंग गति पारंपरिक चुंबकीय तरीकों की तुलना में 1,000 गुना से अधिक हो सकती है। यह अनुमान तकनीक की संभावित क्षमता बताता है, न कि किसी तैयार उत्पाद की गति। अध्ययन नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ।

बहुस्तरीय संरचना में प्रयोग की खासियत

पहले के प्रकाश-आधारित स्विचिंग प्रयोगों में चुंबकीय संरचनाएं अधिकतम तीन परतों तक सीमित थीं और प्रकाश के एक खास ध्रुवण की आवश्यकता होती थी। यूसी सैन डिएगो की टीम ने प्लैटिनम और कोबाल्ट की बारी-बारी से बनी नौ परतों वाली संरचना में चुंबकीय अवस्था बदलकर इन सीमाओं को संबोधित किया। इस प्रयोग में प्रकाश के किसी खास ध्रुवण पर निर्भरता भी नहीं रही।

शोध दल का नेतृत्व विद्युत एवं कंप्यूटर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अब्दुलाये न्दाओ ने किया। मुहम्मद वलीद खालिद अध्ययन के प्रथम लेखक थे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • प्रकाश से किसी पदार्थ की चुंबकीय अवस्था बदलने की प्रक्रिया को प्रकाशीय स्विचिंग कहा जाता है।
  • प्रयोग में प्लैटिनम और कोबाल्ट की नौ बारी-बारी की परतों वाली संरचना का उपयोग हुआ।
  • इस प्रयोग में प्रकाश के किसी विशेष ध्रुवण की अनिवार्यता नहीं थी।
  • यह शोध नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ।

यह शोध तेज और अधिक नियंत्रित चुंबकीय डेटा लेखन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोगात्मक कदम है। हालांकि, इसे व्यावसायिक मेमोरी तकनीक में बदलने के लिए आगे विकास और परीक्षण आवश्यक होंगे।

Originally written on October 28, 2026 and last modified on October 28, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *