पायलटों की सुरक्षा जांच कड़ी, DGCA ने एकमुश्त ड्रग स्क्रीनिंग का आदेश दिया

पायलटों की सुरक्षा जांच कड़ी, DGCA ने एकमुश्त ड्रग स्क्रीनिंग का आदेश दिया

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने देश की घरेलू एयरलाइनों को सभी पायलटों की एक बार अनिवार्य रूप से साइकोएक्टिव पदार्थों की स्क्रीनिंग पूरी करने का निर्देश दिया है। यह प्रक्रिया 31 जुलाई 2027 तक पूरी करनी होगी। करीब 14,000 पायलटों पर लागू यह कदम विमानन सुरक्षा निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्यों लिया गया यह फैसला

यह निर्देश ऐसे समय आया है जब विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर निगरानी और सख्ती बढ़ाई जा रही है। DGCA के मौजूदा Civil Aviation Requirements (CAR) ढांचे के तहत पहले से ही कुछ श्रेणियों के कर्मियों की जांच का प्रावधान है, लेकिन अब दायरा बढ़ाकर सभी पायलटों की एकमुश्त स्क्रीनिंग की जा रही है।

साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उड़ान जैसे संवेदनशील कार्यों में लगे कर्मियों की निर्णय क्षमता, प्रतिक्रिया समय, समन्वय और सतर्कता किसी नशीले या प्रभाव डालने वाले पदार्थ से प्रभावित न हो।

CAR ढांचा और मौजूदा नियम

DGCA भारत का राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियामक है और यह नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन काम करता है। यह एयरलाइनों, उड़ान दल और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों के लिए बाध्यकारी नियम जारी करता है। 31 जनवरी 2022 को संशोधित CAR के अनुसार, फ्लाइट क्रू और एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों के 10 प्रतिशत कर्मियों की हर साल यादृच्छिक जांच की व्यवस्था थी।

नई व्यवस्था इस मौजूदा ढांचे से आगे जाती है, क्योंकि इसमें केवल रैंडम टेस्टिंग नहीं बल्कि सभी पायलटों की एक बार जांच अनिवार्य की गई है।

AI2379 घटना के बाद बढ़ी सख्ती

यह कदम एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 से जुड़े एक गंभीर मध्य-उड़ान मामले के बाद सामने आया। 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली आ रही एयरबस A320 उड़ान में ट्रिपल-हाइड्रॉलिक फेल्योर और अचानक 300 फुट की ऊंचाई गिरावट की घटना हुई थी। बाद में विमान के पायलट-इन-कमांड कैप्टन सूदीप वशिष्ठ की पुष्टि परीक्षण में मारिजुआना पॉजिटिव पाई गई और एयर इंडिया ने उन्हें सेवा से हटा दिया।

ऐसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि विमानन में केवल तकनीकी जांच ही नहीं, बल्कि मानव-कारक निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। इसी कारण नियामक अब परीक्षण व्यवस्था को और व्यापक बनाने की दिशा में बढ़ रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • DGCA भारत का नागरिक उड्डयन नियामक है और यह नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • भारत में साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच केवल पायलटों तक सीमित नहीं है, बल्कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों पर भी लागू होती है।
  • CAR यानी Civil Aviation Requirements, एयरलाइनों और उड़ान संचालन से जुड़े बाध्यकारी नियमों का ढांचा है।
  • एयरबस A320 एक व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला नैरो-बॉडी वाणिज्यिक विमान है।

आगे क्या हो सकता है

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू के अनुसार, सरकार पायलटों के लिए स्थायी और अधिक सख्त परीक्षण दिशानिर्देशों पर हितधारकों से परामर्श कर रही है। प्रस्तावित ढांचा सितंबर 2026 के अंत तक अंतिम रूप ले सकता है।

इस फैसले से साफ है कि भारत का विमानन नियामक सुरक्षा मानकों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी का विषय मान रहा है। आने वाले महीनों में इस दिशा में और कड़े नियम देखने को मिल सकते हैं।

Originally written on September 11, 2026 and last modified on September 11, 2026.

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