आईआईटी-रोपड़ और सेना की एयर डिफेंस ट्रेनिंग में नई शैक्षणिक साझेदारी
आईआईटी-रोपड़ और गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज के बीच 10 सितंबर 2026 को हुए समझौते ने सैन्य प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा के बीच एक नई कड़ी जोड़ दी है। इस समझौते के तहत भारतीय सेना के अधिकारियों के लिए डिफेंस टेक्नोलॉजी में एमटेक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिससे उन्हें प्रशिक्षण के साथ औपचारिक स्नातकोत्तर डिग्री भी मिलेगी।
सेना अधिकारियों के लिए एमटेक का रास्ता
यह व्यवस्था खास तौर पर उन अधिकारियों के लिए है जो गोपालपुर में लॉन्ग एयर डिफेंस कोर्स कर रहे हैं। अब उनके प्रशिक्षण को शैक्षणिक मान्यता मिलेगी और वे डिफेंस टेक्नोलॉजी में एमटेक डिग्री हासिल कर सकेंगे। यह कदम इस बात का संकेत है कि आधुनिक रक्षा व्यवस्था में तकनीकी ज्ञान और शोध-आधारित प्रशिक्षण की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
समझौते पर आईआईटी-रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहुजा और आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल अमित राव ने हस्ताक्षर किए। यह पहल पहले हुए उस एमओयू से भी जुड़ी है, जो दिसंबर 2022 में आर्मी ट्रेनिंग कमांड और आईआईटी-रोपड़ के बीच शैक्षणिक और शोध सहयोग के लिए हुआ था।
शोध, लैब और मार्गदर्शन की सुविधा
समझौते के तहत आईआईटी-रोपड़ के फैकल्टी सदस्य अधिकारियों के शोध प्रबंध और रिसर्च वर्क के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा चयनित अधिकारी आईआईटी-रोपड़ की प्रयोगशालाओं का उपयोग कर सकेंगे और सेमिनारों में ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भाग ले सकेंगे। इससे सैन्य प्रशिक्षण को अकादमिक शोध और तकनीकी प्रयोगों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
डिफेंस टेक्नोलॉजी एक बहुविषयी क्षेत्र है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, मटेरियल्स, सिस्टम्स इंजीनियरिंग और हथियार-सम्बंधी शोध जैसे कई आयाम शामिल होते हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम अधिकारियों को केवल परिचालन अनुभव ही नहीं, बल्कि तकनीकी समझ भी देगा, जो भविष्य की रक्षा चुनौतियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
संस्थागत सहयोग का व्यापक महत्व
आईआईटी-रोपड़, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में से एक है और इसे संस्थान अधिनियम, 1961 के तहत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान माना जाता है। वहीं, गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस कॉलेज भारतीय सेना की उस शाखा का प्रशिक्षण केंद्र है, जो हवाई खतरों से सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों पर काम करती है।
इस सहयोग में आईआईटी-रोपड़ की रक्षा अनुसंधान गतिविधियों से जुड़ी डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन (DRIF) की भी भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय में आईआईटी-रोपड़ के डीन (पीजी एंड रिसर्च) डॉ. सारंग गुंफेकर और DRIF के निदेशक विरभद्र सिंह रावत शामिल रहे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, संस्थान अधिनियम 1961 के तहत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं।
- आर्मी एयर डिफेंस शाखा का मुख्य कार्य हवाई खतरों से सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- डिफेंस टेक्नोलॉजी में इलेक्ट्रॉनिक्स, मटेरियल्स और सिस्टम्स इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्र शामिल होते हैं।
- एमओयू और एमओए भारत में संस्थानों के बीच सहयोग के लिए सामान्य शैक्षणिक दस्तावेज हैं।
यह समझौता दिखाता है कि रक्षा क्षेत्र में भविष्य की तैयारी अब केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे शोध, तकनीक और उच्च शिक्षा से भी जोड़ा जा रहा है।