न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करने पर सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को बताया कि 14 राज्य जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने पर सहमत हो गए हैं। अदालत ने इन राज्यों से सेवा नियमों में संशोधन करने को कहा है। यह विस्तार संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा अधिकारी की उपयुक्तता और कार्यप्रदर्शन के आकलन के अधीन होगा।
राज्यों को सेवा नियम बदलने का निर्देश
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि सहमत 14 राज्य अधिमानतः दो महीने के भीतर अपने सेवा नियमों में संशोधन करें। सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर 2026 को राज्यों को न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का निर्देश दिया था।
नियमों में संशोधन लागू होने तक, इन राज्यों में 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके न्यायिक अधिकारी 62 वर्ष से पहले सेवानिवृत्त नहीं होंगे। हालांकि, सेवा में बने रहने के लिए उन्हें संबंधित उच्च न्यायालय की उपयुक्तता और कार्यप्रदर्शन संबंधी समीक्षा से गुजरना होगा। इसलिए यह अवधि-विस्तार सभी अधिकारियों के लिए स्वतः लागू होने वाला लाभ नहीं है।
संविधान में उच्च न्यायालयों की भूमिका
जिला न्यायपालिका की नियुक्ति और प्रशासन में राज्य सरकारों के साथ उच्च न्यायालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संविधान का अनुच्छेद 233 जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदस्थापन और पदोन्नति से संबंधित है। अनुच्छेद 235 जिला न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण उच्च न्यायालयों को सौंपता है। न्यायिक अधिकारियों की सेवा शर्तें राज्य के नियमों से तय होती हैं, लेकिन वे संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक निर्देशों के अधीन रहती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में ‘ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन बनाम भारत संघ’ मामले में अधीनस्थ न्यायपालिका के सदस्यों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष निर्धारित की थी। उस निर्णय में आगे सेवा जारी रखने के लिए उपयुक्तता के आकलन की व्यवस्था भी शामिल थी। मौजूदा निर्देश इसी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा बढ़ाने की बात करता है।
कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों को फिर सेवा का विकल्प
छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के वे न्यायिक अधिकारी, जो 31 मार्च 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए हैं, फिर से न्यायिक सेवा में लौटने का विकल्प चुन सकते हैं। यह सुविधा केवल उन अधिकारियों के लिए है जिन्होंने दूसरी नौकरी या रोजगार स्वीकार नहीं किया है।
पीठ ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे या हाल में सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों की व्यक्तिगत याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि यह मामला उसके और राज्यों के बीच है। मुख्य न्यायाधीश ने उम्मीद जताई कि अन्य राज्य भी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर सहमत होंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संविधान का अनुच्छेद 233 जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है।
- अनुच्छेद 235 अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का नियंत्रण स्थापित करता है।
- 2002 के सुप्रीम कोर्ट निर्णय में अधीनस्थ न्यायपालिका की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष तय की गई थी।
- आयु-विस्तार संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा उपयुक्तता और कार्यप्रदर्शन के आकलन पर निर्भर है।
यह बदलाव न्यायिक अनुभव को अधिक समय तक बनाए रखने का अवसर देता है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए राज्यों को नियम संशोधित करने होंगे और उच्च न्यायालयों की समीक्षा व्यवस्था निर्णायक रहेगी।