नोएडा विरोध के बाद यूपी में न्यूनतम मजदूरी बढ़ी, ₹20,000 दावे पर सरकार की सफाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में श्रमिकों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह कदम श्रमिकों की बढ़ती मांगों और पड़ोसी राज्यों में अधिक वेतन के मुकाबले को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। साथ ही, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ₹20,000 न्यूनतम वेतन तय किए जाने की खबरें गलत हैं।
अंतरिम वेतन वृद्धि का विवरण
राज्य सरकार ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली श्रेणीवार वेतन वृद्धि की घोषणा की है। नोएडा और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी में लगभग 21 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे उनका मासिक वेतन ₹11,313 से बढ़कर ₹13,690 हो गया है। नगर निगम क्षेत्रों में यह वेतन करीब 15 प्रतिशत बढ़कर ₹13,006 हो गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में 9 प्रतिशत वृद्धि के साथ ₹12,356 तय किया गया है।
अर्धकुशल श्रमिकों के लिए नोएडा और गाजियाबाद में वेतन ₹12,445 से बढ़ाकर ₹15,059 कर दिया गया है। वहीं, कुशल श्रमिकों का मासिक वेतन ₹13,940 से बढ़ाकर ₹16,668 कर दिया गया है। सरकार ने इसे एक अंतरिम व्यवस्था बताया है, जब तक कि व्यापक संशोधन लागू नहीं किया जाता।
₹20,000 वेतन दावे पर स्पष्टीकरण
सरकार ने ₹20,000 न्यूनतम वेतन तय होने के दावों को पूरी तरह खारिज किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है और लोगों से अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करने की अपील की है। यह स्पष्टीकरण उन अफवाहों को शांत करने के लिए दिया गया है, जिनके कारण श्रमिकों में असंतोष बढ़ा था।
राष्ट्रीय श्रम संहिता से जुड़ाव
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर श्रम संहिताओं के तहत न्यूनतम मजदूरी में व्यापक सुधार की प्रक्रिया जारी है। इसका उद्देश्य पूरे देश में एक समान आधारभूत वेतन संरचना तैयार करना है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार अगले महीने एक वेतन बोर्ड गठित करेगी, जो विभिन्न पक्षों से परामर्श कर भविष्य की मजदूरी संरचना पर सिफारिशें देगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- श्रम संहिताओं का उद्देश्य विभिन्न श्रम कानूनों को सरल और एकीकृत करना है।
- भारत में न्यूनतम मजदूरी कौशल, क्षेत्र और उद्योग के आधार पर अलग-अलग होती है।
- वेतन बोर्ड श्रमिकों के लिए उचित वेतन तय करने के लिए गठित किए जाते हैं।
- वेतन असमानता के कारण अक्सर औद्योगिक असंतोष और विरोध प्रदर्शन होते हैं।
नोएडा में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद यह कदम उठाया गया, जहां सैकड़ों श्रमिक बेहतर वेतन और कार्य स्थितियों की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिससे संपत्ति को नुकसान पहुंचा और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने उद्योगों से समय पर वेतन भुगतान, ओवरटाइम का उचित मुआवजा और श्रमिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है, साथ ही हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।