नेलकोंडापल्ली बौद्ध स्थल को वैश्विक विरासत पर्यटन केंद्र बनाने की पहल
तेलंगाना सरकार खम्मम जिले के संरक्षित नेलकोंडापल्ली बौद्ध स्थल को अंतरराष्ट्रीय विरासत और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है। इसके लिए 4.26 करोड़ रुपये की विकास एवं संरक्षण योजना तैयार की गई है। 26 अक्टूबर 2026 को राजस्व, आवास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने पर्यटन सुविधाओं और संरक्षण कार्यों की आधारशिला रखी। परियोजना को 18 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य है।
पर्यटन सुविधाओं और संरक्षण पर खर्च
योजना के तहत 2.50 करोड़ रुपये तेलंगाना राज्य पर्यटन विकास निगम के माध्यम से पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं के विकास पर खर्च होंगे। शेष 1.76 करोड़ रुपये विरासत विभाग द्वारा वैज्ञानिक पुनरुद्धार और संरक्षण के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस काम में प्राचीन विहारों और संरक्षित स्थल पर मौजूद अन्य पुरातात्विक संरचनाओं का संरक्षण शामिल है।
विकास योजना तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इसमें विरासत विभाग के निदेशक प्रोफेसर अर्जुन राव कुथाड़ी, बौद्ध धर्म विशेषज्ञ डॉ. ई. शिवनागी रेड्डी, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी उपेंद्र रेड्डी और बुद्धवनम के विशेष अधिकारी लक्ष्मैया शामिल हैं। योजना को अंतिम रूप देने से पहले बौद्ध भिक्षुओं, विषय-विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों से परामर्श किया जाएगा। इससे संरक्षण और पर्यटन विकास के साथ स्थानीय जरूरतों को भी ध्यान में रखने में मदद मिलेगी।
तीसरी शताब्दी के स्तूप का पुरातात्विक महत्व
नेलकोंडापल्ली का स्तूप तीसरी शताब्दी का माना जाता है और इसे भारत के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में गिना जाता है। स्तूप बौद्ध परंपरा में अवशेषों के संरक्षण और स्मृति से जुड़े धार्मिक स्मारक होते हैं। यहां से लगभग डेढ़ किलोमीटर के दायरे में हुई खुदाई में प्राचीन पुरावशेष मिले हैं। स्थानीय स्तर पर संरक्षण की सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण इन वस्तुओं को हैदराबाद के एक संग्रहालय में रखा गया है।
इस स्थल पर स्तूप से जुड़े पुरातात्विक अवशेषों के साथ प्राचीन विहारों का भी संरक्षण प्रस्तावित है। विहार बौद्ध भिक्षुओं के निवास और मठ-जीवन से जुड़े परिसर होते हैं। वैज्ञानिक संरक्षण में संरचनाओं का दस्तावेजीकरण और उन्हें स्थिर करना शामिल होता है, ताकि उनकी मूल सामग्री और ऐतिहासिक विशेषताएं सुरक्षित रहें। नेलकोंडापल्ली योजना में इसी संरक्षण कार्य को पर्यटन सुविधाओं के विकास के साथ जोड़ा गया है।
स्थानीय विरासत को व्यापक पहचान
यह संरक्षित स्थल तेलंगाना के खम्मम जिले के पालेयर विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। परियोजना का उद्देश्य पुरातात्विक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए आगंतुकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करना है। खुदाई से मिली वस्तुओं का हैदराबाद में संग्रहित होना भी स्थानीय संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
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- नेलकोंडापल्ली का बौद्ध स्तूप तीसरी शताब्दी का माना जाता है।
- यह संरक्षित स्थल तेलंगाना के खम्मम जिले के पालेयर विधानसभा क्षेत्र में स्थित है।
- परियोजना में 1.76 करोड़ रुपये विरासत विभाग के वैज्ञानिक संरक्षण और पुनरुद्धार कार्यों के लिए रखे गए हैं।
- स्तूप के आसपास खुदाई में मिले पुरावशेष हैदराबाद के एक संग्रहालय में संरक्षित हैं।
परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पर्यटन विकास के साथ स्थल की पुरातात्विक संरचनाओं और ऐतिहासिक विशेषताओं का संरक्षण कितनी सावधानी से किया जाता है।