जयपुर की 300वीं वर्षगांठ ने दिलाई वैश्विक पर्यटन सूची में जगह

जयपुर की 300वीं वर्षगांठ ने दिलाई वैश्विक पर्यटन सूची में जगह

नैशनल जियोग्राफिक ने 20 अक्टूबर 2026 को अपनी वार्षिक ‘बेस्ट ऑफ द वर्ल्ड 2027’ सूची जारी की। छह महाद्वीपों के 25 पर्यटन स्थलों में राजस्थान की राजधानी जयपुर भी शामिल है। वर्ष 2027 में शहर की स्थापना के 300 वर्ष पूरे होंगे। सूची में जयपुर की जगह उसकी ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक आयोजनों और इस महत्वपूर्ण पड़ाव से जुड़ी है।

तीन शताब्दियों की विरासत

जयपुर की स्थापना 1727 में आमेर के शासक सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी। शहर की योजना वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य ने बनाई थी। इसकी ग्रिड आधारित बसावट, चौड़ी सड़कें और व्यवस्थित बाजार उस दौर की सुनियोजित शहरी योजना को दर्शाते हैं। ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र की इमारतों में राजपूत और मुगल स्थापत्य की विशेषताएं दिखाई देती हैं। गुलाबी रंग की इमारतों के कारण जयपुर को ‘गुलाबी नगर’ भी कहा जाता है।

शहर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर मंतर शामिल हैं। जयपुर का ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र 2019 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ। जंतर मंतर को अलग से विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। यहां 18वीं शताब्दी में निर्मित खगोलीय यंत्र मौजूद हैं, जिनका उपयोग आकाशीय गणनाओं और खगोलीय अवलोकन के लिए किया जाता था।

उत्सवों से बढ़ेगा सांस्कृतिक आकर्षण

जयपुर की 2027 की पहचान में शहर की स्थापना की 300वीं वर्षगांठ के साथ उसके सांस्कृतिक आयोजन भी अहम हैं। जयपुर साहित्य महोत्सव का 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक आयोजित होना निर्धारित है। इसमें लगभग चार लाख लोगों के आने की उम्मीद है। यह आयोजन लेखकों, प्रकाशकों और पाठकों को साहित्यिक चर्चाओं तथा कार्यक्रमों के लिए एक मंच देता है।

जनवरी के मध्य में मकर संक्रांति के आसपास पतंग महोत्सव भी मनाया जाता है। राजस्थान सहित जयपुर में चैत्र मास के दौरान गणगौर का पर्व आयोजित होता है। यह पर्व गौरी यानी पार्वती के एक रूप से जुड़ा है और इसमें पूजा तथा शोभायात्राएं शामिल होती हैं। ब्लॉक प्रिंटिंग, नीली मिट्टी के बर्तन और मीनाकारी जयपुर की पारंपरिक शिल्पकला के प्रमुख उदाहरण हैं।

वैश्विक सूची में जयपुर का महत्व

‘बेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ सूची में नए पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विशेष वर्षगांठ जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। जयपुर का चयन बताता है कि शहर की अपील केवल उसके ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं है; साहित्य, त्योहार और जीवंत हस्तशिल्प भी उसकी पहचान का हिस्सा हैं। 300वीं वर्षगांठ के आयोजनों से जयपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जयपुर की स्थापना 1727 में सवाई जय सिंह द्वितीय ने की थी।
  • जयपुर का ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र 2019 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ।
  • जयपुर का जंतर मंतर 18वीं शताब्दी के खगोलीय यंत्रों वाला अलग यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
  • गणगौर पर्व गौरी से जुड़ा है, जिन्हें पार्वती का एक रूप माना जाता है।

जयपुर की 2027 की वैश्विक सूची में मौजूदगी उसकी स्थापत्य विरासत और आज भी जीवित सांस्कृतिक परंपराओं—दोनों को रेखांकित करती है।

Originally written on October 22, 2026 and last modified on October 22, 2026.

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