नागास्त्र-1आर की आपूर्ति से सेना की सटीक प्रहार क्षमता मजबूत
सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया की सहायक कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने 13 और 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय सेना को 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग म्यूनिशन सौंपे। किसी निर्माता की ओर से सेना को एक बार में दी गई ऐसी प्रणालियों की यह अब तक की सबसे बड़ी खेप है। यह आपूर्ति सेना की कम दूरी पर सटीक प्रहार करने की क्षमता में नया विकल्प जोड़ती है।
अनुबंध और आपूर्ति का क्रम
भारतीय सेना ने जून 2025 में आपातकालीन खरीद अनुबंध के तहत कंपनी को करीब 158 करोड़ रुपये का ऑर्डर दिया था। इससे पहले मार्च 2025 में इस प्रणाली के तकनीकी परीक्षण हुए थे, जिनमें चार कंपनियों ने भाग लिया। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ऐसी एकमात्र कंपनी थी जिसने परीक्षण में सभी निर्धारित परिचालन मानकों का प्रदर्शन किया।
यह कंपनी की ओर से सेना को नागास्त्र प्रणाली की पहली आपूर्ति नहीं है। दिसंबर 2024 तक सोलर इंडस्ट्रीज 480 नागास्त्र-1 म्यूनिशन की आपूर्ति पूरी कर चुकी थी। नागास्त्र-1आर इसका बाद का संस्करण है और इसमें स्वदेशी सामग्री का अनुपात अधिक बताया गया है।
नागास्त्र-1आर की प्रमुख विशेषताएं
नागास्त्र-1आर स्वदेश में विकसित लोइटरिंग म्यूनिशन है, जिसे कामिकाज़े ड्रोन भी कहा जाता है। इसे भारतीय सेना की कम दूरी की परिचालन जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है और यह सटीक प्रहार कर सकता है। इसकी एक अहम विशेषता लक्ष्य पर हमला करने से पहले मिशन रोककर प्रणाली को वापस बुलाने का विकल्प है। इससे हर स्थिति में इसे लक्ष्य पर इस्तेमाल करना जरूरी नहीं रहता।
कंपनी के अनुसार, नागास्त्र-1आर में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है, जबकि नागास्त्र-1 में यह अनुपात 75 प्रतिशत से अधिक था। स्वदेशी सामग्री का अर्थ किसी प्रणाली के घटकों या कुल मूल्य में देश के भीतर निर्मित हिस्से से है। उपलब्ध जानकारी में इसकी मारक दूरी, उड़ान अवधि, वारहेड का वजन या संचालन की ऊंचाई का विवरण नहीं दिया गया है।
लोइटरिंग म्यूनिशन की भूमिका
लोइटरिंग म्यूनिशन एक मानवरहित हवाई प्रणाली है, जो किसी क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरते हुए लक्ष्य पर कार्रवाई से पहले प्रतीक्षा कर सकती है। यह निगरानी और लक्ष्य पर प्रहार—दोनों क्षमताओं को एक प्रणाली में जोड़ती है। पारंपरिक मिसाइल आम तौर पर पहले से तय लक्ष्य की ओर छोड़ी जाती है, जबकि लोइटरिंग म्यूनिशन हवा में रहते हुए लक्ष्य पर कार्रवाई के निर्णय की गुंजाइश देती है। नागास्त्र-1आर का वापसी विकल्प इसे उन प्रणालियों से अलग करता है जिन्हें हर मिशन में इस्तेमाल के बाद नष्ट होना होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नागास्त्र-1आर का भारतीय सेना के साथ अनुबंध करीब 158 करोड़ रुपये का था।
- मार्च 2025 के तकनीकी परीक्षणों में चार कंपनियों ने भाग लिया था।
- नागास्त्र-1आर में 80 प्रतिशत से अधिक और नागास्त्र-1 में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है।
- अक्टूबर 2026 में नागास्त्र-1आर की 450 प्रणालियों की आपूर्ति की गई; इससे पहले 480 नागास्त्र-1 की आपूर्ति पूरी हुई थी।
नई खेप और अधिक स्वदेशी सामग्री वाला संस्करण भारतीय सेना को कम दूरी पर निगरानी तथा सटीक कार्रवाई के लिए अतिरिक्त क्षमता देते हैं।