नई दिल्ली में आयोजित हुआ अखिल भारतीय जल सचिव सम्मेलन, जल सुरक्षा पर बनी रणनीति

नई दिल्ली में आयोजित हुआ अखिल भारतीय जल सचिव सम्मेलन, जल सुरक्षा पर बनी रणनीति

जल शक्ति मंत्रालय के तत्वावधान में 13 और 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में अखिल भारतीय जल सचिव सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल विभागों के सचिवों सहित लगभग 200 वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य देश में जल शासन (Water Governance), जल संसाधन प्रबंधन और जल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर समन्वित रणनीति तैयार करना था। इस दौरान राज्यों ने “जल सुरक्षित, भारत सुरक्षित” के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का संकल्प भी लिया।

सम्मेलन का नेतृत्व और उद्देश्य

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने की। केंद्रीय राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग के सचिव वी. एल. कंथा राव ने भी कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता की। जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग देश में जल संसाधनों के समुचित विकास, संरक्षण और प्रबंधन के लिए नीतियां तैयार करने तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाता है।

जल प्रबंधन से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा

सम्मेलन में जल प्रशासन से जुड़े आठ प्रमुख विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इनमें जल संरक्षण, बांध सुरक्षा, सिंचाई सुधार, भूजल प्रबंधन तथा कैच द रेन 2026 अभियान प्रमुख रहे। जल संरक्षण के लिए वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) जैसे उपायों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही राज्यों के बीच सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी चर्चा हुई।

जारी किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेज

14 जुलाई 2026 को सम्मेलन के दौरान जल प्रबंधन से संबंधित तीन महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किए गए। इनमें वाराणसी के लिए उपचारित जल के पुनः उपयोग की शहर-स्तरीय कार्ययोजना तथा कृत्रिम भूजल पुनर्भरण एवं भूजल संरक्षण संरचनाओं के संचालन एवं रखरखाव (O&M) मैनुअल प्रमुख हैं। इन दस्तावेजों का उद्देश्य जल संसाधनों के बेहतर उपयोग, पुनर्चक्रण और संरक्षण को बढ़ावा देना है, ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सके।

बांध सुरक्षा और भविष्य की कार्ययोजना

सम्मेलन में बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया गया। यह अधिनियम देश के निर्दिष्ट बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है तथा बांधों की निगरानी और रखरखाव के लिए संस्थागत व्यवस्था निर्धारित करता है। राज्यों ने यह लक्ष्य निर्धारित किया कि दिसंबर 2026 तक सभी निर्दिष्ट बांधों का व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन (Comprehensive Dam Safety Evaluation) पूरा किया जाएगा। इससे संभावित जोखिमों को कम करने और जल संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • जल शक्ति मंत्रालय की स्थापना वर्ष 2019 में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय तथा पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के विलय से हुई थी।
  • कैच द रेन अभियान वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए संचालित किया जाता है।
  • बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 देश के निर्दिष्ट बांधों की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
  • वाराणसी विश्व के सबसे प्राचीन निरंतर आबाद शहरों में से एक है और यह गंगा नदी के तट पर स्थित है।

अखिल भारतीय जल सचिव सम्मेलन ने देश में जल संसाधनों के सतत और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जल संरक्षण, भूजल प्रबंधन, बांध सुरक्षा और उपचारित जल के पुनः उपयोग जैसे विषयों पर बनी रणनीतियां भविष्य में जल सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। “जल सुरक्षित, भारत सुरक्षित” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित प्रयास देश के जल संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को नई गति देंगे।

Originally written on July 14, 2026 and last modified on July 14, 2026.

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