छह दशक बाद गिर के जंगलों में लौटा भारतीय ग्रे हॉर्नबिल
गुजरात के गिर वन क्षेत्र में छह दशक से अधिक समय बाद भारतीय ग्रे हॉर्नबिल (चिलोट्रो) की सफल वापसी हुई है। सहकर्मी-समीक्षित वैज्ञानिक पत्रिका बर्ड्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पुनर्स्थापित किए गए हॉर्नबिल न केवल जंगल में जीवित हैं, बल्कि प्राकृतिक वातावरण में सफलतापूर्वक प्रजनन भी कर रहे हैं। यह उपलब्धि भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है और स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को उनके पुराने आवास में वापस लाने का सफल उदाहरण प्रस्तुत करती है।
भारतीय ग्रे हॉर्नबिल की विशेषताएँ
भारतीय ग्रे हॉर्नबिल भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली एक प्रमुख पक्षी प्रजाति है। यह बुसेरोटिडी (Bucerotidae) परिवार का सदस्य है, जिसमें बड़े आकार के पक्षी शामिल होते हैं। हॉर्नबिल की सबसे प्रमुख पहचान इसकी लंबी, मुड़ी हुई चोंच और ऊपरी चोंच पर स्थित कठोर उभार (कैस्क) है। यह पक्षी मुख्य रूप से फलों, कीटों और छोटे जीवों पर निर्भर रहता है तथा जंगलों में बीजों के प्रसार के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण इसे वन पारिस्थितिकी का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है।
गिर में पुनर्स्थापन कार्यक्रम
गुजरात का गिर क्षेत्र गिर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य के लिए प्रसिद्ध है, जो भारत में एशियाई शेर का एकमात्र प्राकृतिक आवास है। इसी क्षेत्र में भारतीय ग्रे हॉर्नबिल की वापसी के लिए विशेष पुनर्स्थापन कार्यक्रम चलाया गया। इस परियोजना के अंतर्गत दो चरणों में कुल 40 हॉर्नबिल छोड़े गए। पहले चरण में वर्ष 2021-22 के दौरान 28 पक्षियों को जंगल में छोड़ा गया, जबकि वर्ष 2023 में दूसरे चरण के तहत 12 और हॉर्नबिलों को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया गया। इन पक्षियों के व्यवहार और गतिविधियों की वैज्ञानिक निगरानी के लिए 11 नर हॉर्नबिलों में सैटेलाइट ट्रांसमीटर लगाए गए।
वैज्ञानिक निगरानी और प्रजनन की सफलता
सैटेलाइट ट्रांसमीटरों की सहायता से वैज्ञानिकों ने पक्षियों की आवाजाही, आवास के उपयोग और प्रजनन व्यवहार का विस्तृत अध्ययन किया। अध्ययन में यह पाया गया कि पहले वर्ष में एक जोड़े ने सफलतापूर्वक घोंसला बनाया, जबकि दूसरे वर्ष में तीन अतिरिक्त जोड़ों ने भी प्रजनन किया। दो टैग किए गए नर हॉर्नबिलों का नाम प्रसिद्ध भारतीय पक्षी वैज्ञानिक लवकुमार खाचर और आर.एस. धर्मकुमारसिंहजी की स्मृति में क्रमशः एलके (LK) और आरएसडी (RSD) रखा गया। यह अध्ययन “Reintroduction of Indian Grey Hornbills in Gir, India: Insights into Ranging, Habitat Use, Nesting and Behavioural Patterns” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है।
संरक्षण के लिए पुनर्स्थापन का महत्व
वन्यजीव संरक्षण में पुनर्स्थापन (Reintroduction) ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से किसी प्रजाति को उसके पुराने प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित किया जाता है, जहां वह स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुकी हो। गिर का हॉर्नबिल पुनर्स्थापन कार्यक्रम इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि उचित वैज्ञानिक योजना, सतत निगरानी और संरक्षण प्रयासों से किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास में सफलतापूर्वक वापस लाया जा सकता है। यह परियोजना भविष्य में अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय ग्रे हॉर्नबिल बुसेरोटिडी (Bucerotidae) परिवार का सदस्य है।
- गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान भारत में एशियाई शेर का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।
- वन्यजीव अनुसंधान में सैटेलाइट ट्रांसमीटर का उपयोग पक्षियों और जानवरों की गतिविधियों तथा आवास के अध्ययन के लिए किया जाता है।
- लवकुमार खाचर और आर.एस. धर्मकुमारसिंहजी गुजरात के प्रसिद्ध भारतीय पक्षी वैज्ञानिक (ऑर्निथोलॉजिस्ट) थे।
- पुनर्स्थापन (Reintroduction) किसी स्थानीय रूप से विलुप्त प्रजाति को उसके पूर्व प्राकृतिक आवास में दोबारा बसाने की संरक्षण पद्धति है।
गिर के जंगलों में भारतीय ग्रे हॉर्नबिल की सफल वापसी भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास की एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह परियोजना दर्शाती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और प्रभावी संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से जैव विविधता को पुनर्जीवित किया जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह पहल देश में अन्य विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण कार्यक्रमों के लिए भी एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है।