नई दिल्ली बैठक से BRICS कर सहयोग को मिली नई दिशा
नई दिल्ली में 23 सितंबर 2026 को BRICS देशों के कर प्रशासन प्रमुखों की बैठक आयोजित हुई, जो भारत की BRICS कर सहयोग ट्रैक की अध्यक्षता का समापन कार्यक्रम रही। इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के कर प्रशासन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
भारत की अध्यक्षता में कर सहयोग के तीन प्रमुख फोकस
वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक का उद्घाटन किया। भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS कर सहयोग में तीन विषय लगातार केंद्र में रहे—तकनीक, प्रशासन और लोग। इन विषयों के आधार पर कर प्रणालियों, संस्थागत प्रक्रियाओं और पेशेवर प्रशिक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
BRICS कर सहयोग ट्रैक का उद्देश्य सदस्य देशों के कर प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाना, क्षमता निर्माण को मजबूत करना और बेहतर प्रशासनिक प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है। यह मंच कर प्रशासन प्रमुखों की बैठकों और तकनीकी विषयों पर काम करने वाले समूहों के माध्यम से संचालित होता है।
दो नए कार्य समूह और क्रॉस-लर्निंग प्लेटफॉर्म
बैठक में भारत की पहल पर दो नए कार्य समूह औपचारिक रूप से बनाए गए। पहला कार्य समूह अंतरराष्ट्रीय कराधान और ट्रांसफर प्राइसिंग पर केंद्रित है, जबकि दूसरा राजस्व सांख्यिकी से जुड़ा है। ट्रांसफर प्राइसिंग बहुराष्ट्रीय समूहों की संबद्ध इकाइयों के बीच लेन-देन से जुड़ा कर विषय है, जबकि राजस्व सांख्यिकी कर संग्रह के आकलन और वर्गीकरण से संबंधित होती है।
इसके साथ ही BRICS Tax Cross-Learning Lab की शुरुआत की गई, जिसे आपसी सीख और अनुभव साझा करने के संयुक्त मंच के रूप में विकसित किया गया है। यह मंच Client-Centric Administration Working Group और HR Practices Working Group के कार्यों को एक साथ जोड़ता है। बैठक में BRICS Tax Support Network के Terms of Reference को भी मंजूरी दी गई।
समापन रिपोर्ट और आगे की अध्यक्षता
बैठक के अंत में BRICS Tax Progress Report 2026 पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें भारत की अध्यक्षता के दौरान हुई प्रगति और प्रमुख परिणाम दर्ज किए गए। साथ ही चीन को 2027 के लिए BRICS कर सहयोग ट्रैक का अगला अध्यक्ष स्वागतपूर्वक सौंपा गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूह के रूप में हुई थी।
- बाद में BRICS का विस्तार नए सदस्य देशों तक हुआ, जिससे इसका वैश्विक दायरा बढ़ा।
- ट्रांसफर प्राइसिंग अंतरराष्ट्रीय कराधान का अहम विषय है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के भीतर होने वाले लेन-देन से जुड़ा होता है।
- राजस्व सांख्यिकी सरकारों को कर संग्रह, अनुपालन प्रवृत्तियों और वित्तीय प्रशासन की निगरानी में मदद करती है।
नई दिल्ली बैठक ने यह संकेत दिया कि BRICS देशों के बीच कर प्रशासन अब केवल नीति-समन्वय तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के जरिए अधिक व्यावहारिक दिशा में आगे बढ़ रहा है।