धर्म सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के राज्यपाल, जानें संवैधानिक प्रक्रिया

धर्म सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के राज्यपाल, जानें संवैधानिक प्रक्रिया

धर्म सिंह बिसेन ने 19 अक्टूबर 2026 को देहरादून स्थित लोक भवन में उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ ली। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें शपथ दिलाई। बिसेन ने लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लिया, जो पांच वर्ष से अधिक समय तक इस पद पर रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को बिसेन की नियुक्ति की घोषणा की थी।

नियुक्ति और शपथ की प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति अपने हस्ताक्षर और मुहर सहित अधिपत्र के माध्यम से करते हैं। राज्यपाल का चुनाव जनता या राज्य विधानमंडल द्वारा नहीं होता। पद ग्रहण करने से पहले अनुच्छेद 159 के तहत शपथ या प्रतिज्ञान लिया जाता है। यह शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। उनकी अनुपस्थिति में न्यायालय के उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश यह दायित्व निभाते हैं।

शपथ में राज्यपाल संविधान और कानून का संरक्षण, परिरक्षण तथा प्रतिरक्षण करने और राज्य के लोगों की सेवा व कल्याण के लिए समर्पित रहने का संकल्प लेते हैं। बिसेन का शपथ ग्रहण समारोह राज्यपाल के आधिकारिक निवास और कार्यालय लोक भवन में हुआ। समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव आनंद बर्धन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल का संवैधानिक पद और कार्यकाल

अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान करता है। इसी अनुच्छेद के तहत एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है, जिसका प्रयोग संविधान के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है। सामान्यतः राज्यपाल मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करते हैं।

अनुच्छेद 156 के मुताबिक राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं। सामान्य कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्ष का होता है, लेकिन उत्तराधिकारी के पद संभालने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रहते हैं। गुरमीत सिंह का पांच वर्ष से अधिक का कार्यकाल इसी पद की संवैधानिक निरंतरता को रेखांकित करता है।

बिसेन का राजनीतिक अनुभव

बिसेन चार बार विधायक रह चुके हैं और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनके पास स्कूल शिक्षा, परिवहन और खनन जैसे विभागों की जिम्मेदारी रही। शपथ के बाद उन्होंने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने और स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पर्यटन से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने को अपने उद्देश्यों में शामिल बताया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अनुच्छेद 153 प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 155 राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित है।
  • अनुच्छेद 159 राज्यपाल की शपथ या प्रतिज्ञान का प्रावधान करता है।
  • अनुच्छेद 156 के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं।

बिसेन का कार्यकाल उत्तराखंड में राज्यपाल पद की संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन से जुड़ा होगा। उनकी नियुक्ति और शपथ भारतीय संघीय व्यवस्था में राज्यपाल की भूमिका को फिर चर्चा में लाती है।

Originally written on October 19, 2026 and last modified on October 19, 2026.

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