दक्षिणी हिंद महासागर में भारत की मत्स्य भागीदारी को नई ताकत
केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को दक्षिणी हिंद महासागर मत्स्य समझौते (एसआईओएफए) में भारत के शामिल होने को मंजूरी दी। इससे भारत को क्षेत्रीय मत्स्य प्रबंधन में निर्णय प्रक्रिया और वैज्ञानिक कार्यों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही, भारतीय ध्वज वाले जहाजों और उद्यमों को समझौते के दायरे में आने वाले कुछ मत्स्य संसाधनों के लिए अधिकृत किया जा सकेगा।
समझौते का दायरा और भारत की स्थिति
एसआईओएफए दक्षिणी हिंद महासागर क्षेत्र में मत्स्य संसाधनों के प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय ढांचा उपलब्ध कराता है। इसके दायरे में मछलियां, मोलस्क, क्रस्टेशियन और अन्य स्थिर समुद्री प्रजातियां आती हैं। हालांकि, अत्यधिक प्रवासी प्रजातियां तथा तटीय देशों के अधिकार क्षेत्र में आने वाली स्थिर प्रजातियां इसके दायरे से बाहर हैं।
इस समझौते पर 7 जुलाई 2006 को रोम में हस्ताक्षर हुए थे और यह जून 2012 में लागू हुआ। भारत 2022 से ‘सहयोगी गैर-अनुबंधकारी पक्ष’ की स्थिति में था। इस व्यवस्था में भारत की भागीदारी सीमित थी, खासकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में। अब सदस्यता से भारत को समझौते के तहत अधिक औपचारिक भूमिका मिलेगी। एसआईओएफए के दस अन्य अनुबंधकारी पक्षों में ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और स्पेन शामिल हैं।
मछली पकड़ने और वैज्ञानिक सहयोग के अवसर
सदस्यता के बाद भारतीय ध्वज वाले मछली पकड़ने वाले जहाज और उद्यम एसआईओएफए के अधिकार क्षेत्र में स्क्विड, टूथफिश, अल्फोन्सिनो और अन्य गैर-प्रवासी मत्स्य भंडार के लिए अधिकृत हो सकेंगे। यह अनुमति समझौते के क्षेत्रीय प्रबंधन ढांचे के अंतर्गत होगी।
भारत वैज्ञानिक समिति और अनुपालन समिति में भी भाग ले सकेगा। इन मंचों के जरिए वैज्ञानिक आंकड़ों, अनुसंधान कार्यक्रमों और मछली भंडार के आकलन से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता संभव होगी। इससे क्षेत्र के मत्स्य संसाधनों पर उपलब्ध जानकारी और उनके प्रबंधन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विमर्श में भारत की भूमिका बढ़ेगी। यह कदम दिसंबर 2025 में जारी भारत के उच्च समुद्र मत्स्य पालन दिशानिर्देशों के बाद आया है।
खुले समुद्र में निगरानी और शासन
एसआईओएफए में शामिल होने से भारत उच्च समुद्र बोर्डिंग और निरीक्षण योजना में भी भाग ले सकेगा। यह योजना खुले समुद्र में मत्स्य गतिविधियों के प्रबंधन से संबंधित है। समझौते की सदस्यता भारत को अंतरराष्ट्रीय मत्स्य शासन में भागीदारी का अवसर देती है और उसकी नीली अर्थव्यवस्था से जुड़ी प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एसआईओएफए पर 7 जुलाई 2006 को रोम में हस्ताक्षर किए गए और यह जून 2012 में लागू हुआ।
- भारत 2022 से इस समझौते में सहयोगी गैर-अनुबंधकारी पक्ष था।
- अत्यधिक प्रवासी समुद्री प्रजातियां एसआईओएफए के दायरे से बाहर हैं।
- भारत के उच्च समुद्र मत्स्य पालन दिशानिर्देश दिसंबर 2025 में जारी किए गए थे।
इस मंजूरी से भारत को दक्षिणी हिंद महासागर के मत्स्य संसाधनों के प्रबंधन, वैज्ञानिक सहयोग और खुले समुद्र की निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं में अधिक सक्रिय भागीदारी का रास्ता मिलेगा।