तेलंगाना के शहरी बदलाव को जर्मन वित्तीय सहायता का सहारा
तेलंगाना में जलापूर्ति, सीवरेज और शहरी पर्यावरण सुधारने के लिए प्रस्तावित तेलंगाना जलवायु-सक्षम शहरी रूपांतरण पहल को जर्मनी की विकास बैंक केएफडब्ल्यू से 5,000 करोड़ रुपये की बाहरी वित्तीय सहायता देने के प्रस्ताव को आर्थिक कार्य विभाग की स्क्रीनिंग समिति ने 9 अक्टूबर 2026 को मंजूरी दी। कार्यक्रम की कुल अनुमानित लागत 7,143 करोड़ रुपये है, जिसमें राज्य सरकार 2,143 करोड़ रुपये देगी।
राज्य के शहरों के लिए व्यापक योजना
तेलंगाना जलवायु-सक्षम शहरी रूपांतरण पहल का उद्देश्य चुनिंदा शहरी स्थानीय निकायों में बुनियादी सेवाओं और जलवायु-अनुकूल अवसंरचना को मजबूत करना है। इसके तहत चौबीसों घंटे जलापूर्ति, वर्षाजल निकासी, जल निकायों का पुनर्जीवन, ठोस कचरे का एकीकृत प्रबंधन, नीला-हरित अवसंरचना और टिकाऊ परिवहन जैसे क्षेत्रों को सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम का एक प्रमुख हिस्सा ग्रेटर वारंगल नगर निगम की व्यापक सीवरेज और अपशिष्ट जल प्रबंधन परियोजना है। इसकी अनुमानित लागत करीब 5,257 करोड़ रुपये है। योजना में भूमिगत सीवरेज नेटवर्क, बेहतर अपशिष्ट जल शोधन सुविधाएं और शुद्ध किए गए पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था शामिल है। इससे गंदे पानी का सुरक्षित निपटान और उपचारित जल का उपयोग संभव होगा।
कार्यान्वयन और वित्तीय प्रक्रिया
तेलंगाना शहरी वित्त एवं अवसंरचना विकास निगम इस कार्यक्रम की कार्यान्वयन एजेंसी होगी, जबकि आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। मंत्रालय ने ऋण समझौते पर हस्ताक्षर से पहले हर परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने और तकनीकी मूल्यांकन कराने की सिफारिश की है। इसलिए स्क्रीनिंग समिति की मंजूरी के बाद भी परियोजनाओं की तैयारी और जांच अहम चरण रहेंगे।
नीति आयोग ने परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट करने और शहरी प्रशासन में सुधार की सलाह दी थी। राज्य सरकार ने इन सुझावों को स्वीकार किया है। कार्यक्रम में अमृत 2.0, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और शहरी चुनौती कोष के साथ तालमेल बनाने की भी योजना है, ताकि शहरी विकास से जुड़ी पहलों को एक-दूसरे का पूरक बनाया जा सके।
नगर निकायों की संवैधानिक भूमिका
शहरी सेवाओं की जिम्मेदारी में नगर निकायों की भूमिका संविधान से जुड़ी है। 1992 के 74वें संविधान संशोधन ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक मान्यता दी और संविधान में भाग 9क जोड़ा। अनुच्छेद 243ब राज्य विधानसभाओं को नगरपालिकाओं को कार्य सौंपने का अधिकार देता है। बारहवीं अनुसूची में ऐसे 18 विषय हैं, जिनमें जलापूर्ति, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 74वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 नगरपालिकाओं और शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित है।
- संविधान की बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं को सौंपे जा सकने वाले 18 विषय दिए गए हैं।
- अनुच्छेद 243ब राज्य विधानसभाओं को नगरपालिकाओं के कार्य और जिम्मेदारियां निर्धारित करने का अधिकार देता है।
- अमृत 2.0 का प्रमुख लक्ष्य शहरी क्षेत्रों में जल सुरक्षा और सार्वभौमिक जलापूर्ति कवरेज को बढ़ावा देना है।
तेलंगाना की इस पहल में बाहरी वित्तीय सहायता के साथ राज्य का योगदान भी शामिल है। विस्तृत परियोजना प्रतिवेदनों और तकनीकी मूल्यांकन के बाद इसकी शहरी जल एवं स्वच्छता योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता तय होगा।