लक्षद्वीप ने वयस्क साक्षरता में हासिल किया शत-प्रतिशत लक्ष्य

लक्षद्वीप ने वयस्क साक्षरता में हासिल किया शत-प्रतिशत लक्ष्य

लक्षद्वीप को 11 अक्टूबर 2026 को शत-प्रतिशत साक्षर केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया। कवरत्ती में आयोजित कार्यक्रम में प्रशासक प्रफुल्ल पटेल ने यह घोषणा की। यह उपलब्धि केंद्र प्रायोजित ‘उल्लास’ यानी नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत शुरुआती सर्वेक्षण में चिह्नित वयस्क निरक्षर लोगों के आकलन से जुड़ी है। सर्वेक्षण में मिले सभी 1,113 पात्र शिक्षार्थियों ने आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता आकलन परीक्षा (एफएलएनएटी) उत्तीर्ण की।

उल्लास कार्यक्रम का उद्देश्य

उल्लास उन 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए है, जिन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त करने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम का लक्ष्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि बुनियादी गणितीय समझ और रोजमर्रा के जीवन में काम आने वाले कौशल विकसित करना भी है। इसमें वित्तीय, डिजिटल और कानूनी साक्षरता जैसे जीवन-कौशल शामिल हो सकते हैं।

कार्यक्रम के तहत शिक्षार्थियों को आधारभूत शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल और सतत शिक्षा के अवसर भी दिए जाते हैं। इसके संचालन में समुदाय की भागीदारी और स्वयंसेवकों का सहयोग महत्वपूर्ण है। इस तरह सीखने की प्रक्रिया को उन वयस्कों तक पहुँचाने का प्रयास किया जाता है, जो किसी कारण से नियमित शिक्षा से दूर रह गए।

घर-घर तक पहुँचा शिक्षण और आकलन

लक्षद्वीप के शिक्षा विभाग ने सर्वेक्षण में पहचाने गए 1,113 वयस्कों के लिए शिक्षण और आकलन अभियान चलाया। उनकी पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणित की क्षमता का मूल्यांकन एफएलएनएटी के माध्यम से किया गया। इस परीक्षा में सफल होना कार्यक्रम के तहत निर्धारित आधारभूत दक्षताओं को पूरा करने का संकेत है।

जो शिक्षार्थी निर्धारित परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुँच सकते थे या वहाँ जाने में हिचकिचाते थे, उनके लिए शिक्षकों और पर्यवेक्षकों ने घर-घर जाकर आकलन किया। पात्र शिक्षार्थियों को प्रक्रिया पूरी करने का अवसर देने के लिए अनुवर्ती मूल्यांकन और दोबारा परीक्षा भी आयोजित की गई। इसलिए घोषित शत-प्रतिशत स्थिति का संबंध सर्वेक्षण में चिह्नित पात्र वयस्कों और कार्यक्रम के आकलन से है।

कार्यक्रम का दावा और जनगणना की परिभाषा

साक्षरता का प्रतिशत किस आयु-वर्ग को गिना गया है और किस पद्धति से आकलन हुआ है, इस पर निर्भर करता है। भारत की जनगणना की पारंपरिक परिभाषा में सात वर्ष या उससे अधिक आयु का वह व्यक्ति साक्षर माना जाता है, जो किसी भाषा में समझ के साथ पढ़ और लिख सकता हो। इसके विपरीत, उल्लास 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन वयस्कों पर केंद्रित है जिन्होंने औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं पाई।

इसलिए लक्षद्वीप की घोषणा को जनगणना के आयु-आधारित साक्षरता माप से अलग, उल्लास के तहत पहचाने गए पात्र शिक्षार्थियों के सफल आकलन के संदर्भ में समझना चाहिए।

लक्षद्वीप की उपलब्धि का महत्व

यह पहल दिखाती है कि वयस्क शिक्षा में स्थानीय स्तर पर पहचान, लचीली शिक्षण व्यवस्था और घर-आधारित मूल्यांकन की भूमिका कितनी अहम हो सकती है। द्वीपों में घर जाकर परीक्षा कराने जैसे प्रयास उन लोगों की भागीदारी बढ़ाने में मददगार रहे, जिन्हें केंद्र तक पहुँचना कठिन था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उल्लास 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन लोगों के लिए वयस्क शिक्षा कार्यक्रम है, जिन्हें औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं मिली।
  • एफएलएनएटी का पूरा नाम आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता आकलन परीक्षा है।
  • जनगणना की पारंपरिक परिभाषा में सात वर्ष या उससे अधिक आयु के व्यक्ति को साक्षर माना जाता है, यदि वह समझ के साथ पढ़ और लिख सके।
  • कवरत्ती लक्षद्वीप की राजधानी है; वहाँ आयोजित कार्यक्रम में शत-प्रतिशत साक्षरता की घोषणा की गई।

लक्षद्वीप का अनुभव वयस्क शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने में समुदाय, शिक्षकों और लचीले आकलन की उपयोगिता रेखांकित करता है।

Originally written on October 13, 2026 and last modified on October 13, 2026.

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