तमिलनाडु में मुल्लेली संरक्षण को मिलेगी सामुदायिक ताकत
तमिलनाडु के तेनकासी वन मंडल ने दुर्लभ मद्रास हेजहॉग के संरक्षण के लिए अपने ‘स्वर्ण सियार दूत’ कार्यक्रम का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा है। स्थानीय भाषा में ‘मुल्लेली’ कहलाने वाले इस कांटेदार, निशाचर स्तनधारी को अब विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों और ग्रामीणों के सहयोग से संरक्षण संदेशों में शामिल किया जाएगा।
विद्यार्थियों और ग्रामीणों की भागीदारी
यह कार्यक्रम वर्ष 2025 में स्वर्ण सियार के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था। इसके तहत प्रशिक्षित विद्यार्थी और स्वयंसेवक स्थानीय समुदायों तक वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी जानकारी पहुंचाते हैं। नए प्रस्ताव में मद्रास हेजहॉग को भी शामिल किया जाएगा, ताकि दोनों प्रजातियों के बारे में लोगों की समझ बढ़े और देखे गए वन्यजीवों की सूचना वन विभाग तक पहुंच सके।
विद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘वन रक्षक भाई’ और ‘वन रक्षक बहन’ नामित किए जाएंगे। वे नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। वन अधिकारी शैक्षणिक संस्थानों का दौरा करेंगे और गांवों में प्रजाति की पहचान तथा स्थानीय जानकारी जुटाने से जुड़ी गतिविधियां आयोजित करेंगे। वन क्षेत्रों के पास स्थित बस्तियों में ग्राम वन समितियां विद्यार्थियों के साथ समन्वय करेंगी।
आवास और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां
तेनकासी वन मंडल के अनुसार, अलंगुलम, शंकरनकोविल, शिवगिरि और उथुमलाई क्षेत्रों में मद्रास हेजहॉग की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन कर्मचारियों ने इसके दिखने की घटनाओं का तस्वीरों के माध्यम से दस्तावेजीकरण भी किया है। हालांकि, आवास का नष्ट होना, सड़कों पर वाहनों से मौत, अवैध शिकार और पारंपरिक औषधियों के लिए पकड़ना इसकी आबादी पर दबाव डालते हैं। इसलिए कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के बीच संरक्षण जागरूकता और वन्यजीव दिखने की घटनाओं की रिपोर्टिंग पर जोर है।
सर्वेक्षण और शोध से संरक्षण को दिशा
तेनकासी वन मंडल के सर्वेक्षण में 38 गांवों के 867 लोगों ने बताया कि उन्होंने मद्रास हेजहॉग देखा है। इनमें से 53 प्रतिशत लोगों ने मानसून के दौरान इसे देखने की सूचना दी। तमिलनाडु सरकार ने सितंबर 2026 में चार कम चर्चित संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए। इसमें वर्ष 2025–26 के लिए मद्रास हेजहॉग को 20.50 लाख रुपये दिए गए हैं।
मद्रास हेजहॉग संरक्षण परियोजना में रेडियो टैगिंग भी शामिल है। अक्टूबर 2026 में पेकुलम घासभूमि क्षेत्र में एक टैग किए गए हेजहॉग के बच्चे को जन्म देने का रिकॉर्ड मिला, जिससे इसके प्रजनन व्यवहार की जानकारी जुटाने में मदद मिल रही है। इसके अलावा, जनवरी 2026 में उन्नत वन्यजीव संरक्षण संस्थान के नेतृत्व में तूतीकोरिन जिले के थेरी वनों में विशेष अध्ययन शुरू किया गया। इस शोध का उद्देश्य प्रजाति के लिए संरक्षण कार्ययोजना तैयार करने में सहायता देना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- मद्रास हेजहॉग को तमिल भाषा में ‘मुल्लेली’ कहा जाता है।
- तेनकासी वन मंडल के सर्वेक्षण में 38 गांवों के 867 लोगों से जानकारी जुटाई गई।
- मद्रास हेजहॉग संरक्षण परियोजना में रेडियो टैगिंग शामिल है।
- तमिलनाडु ने सितंबर 2026 में चार कम चर्चित संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए कुल एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए।
समुदाय आधारित निगरानी, शोध और स्थानीय जागरूकता का मेल मद्रास हेजहॉग के सामने मौजूद खतरों की पहचान और संरक्षण प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।