तमिलनाडु के जैविक पनैया गुड़ को मिला यूरोपीय बाजार

तमिलनाडु के जैविक पनैया गुड़ को मिला यूरोपीय बाजार

तमिलनाडु के गोबिचेट्टीपलायम से जैविक पनैया गुड़ पाउडर की पहली खेप बुल्गारिया भेजी गई है। 15 अक्टूबर 2026 को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने 1.755 मीट्रिक टन की इस खेप को रवाना करने में सहायता की। यह पहल भारत के पारंपरिक ताड़-आधारित उत्पादों को नए विदेशी बाजारों तक पहुंचाने और जैविक निर्यात में विविधता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

गोबिचेट्टीपलायम से वरना तक पहुंची खेप

यह पनैया गुड़ पाउडर, जिसे पनैया ब्लॉसम नेक्टर भी कहा जाता है, तमिलनाडु के इरोड जिले के गोबिचेट्टीपलायम में तैयार किया गया। इरोड स्थित वेलबीइंग फूड्स ने चेन्नई की चेट्टी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से इसका उत्पादन और निर्यात किया। बुल्गारिया में सो लाइफ लिमिटेड इस उत्पाद का आयात और वितरण करेगी। खेप का गंतव्य वरना है, जो बुल्गारिया के काला सागर तट पर स्थित एक प्रमुख बंदरगाह शहर है।

इस निर्यात से पारंपरिक पनैया उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की कोशिश है। पनैया गुड़ ठोस और पाउडर, दोनों रूपों में उपलब्ध होता है। पाउडर स्वरूप का उपयोग और भंडारण आसान हो सकता है, जिससे यह नए उपभोक्ता बाजारों के लिए उपयोगी उत्पाद बनता है। हालांकि, इस खेप का महत्व केवल एक उत्पाद के निर्यात तक सीमित नहीं है; यह स्थानीय स्तर पर जैविक खेती और प्रसंस्करण को बाजार से जोड़ने की पहल भी है।

दो जैविक प्रमाणन से मिली बाजार तक पहुंच

खेप को भारत के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) और यूरोपीय संघ के जैविक मानकों के तहत प्रमाणन मिला है। जैविक प्रमाणन उत्पादन और उत्पाद के लिए निर्धारित मानकों के पालन का नियामकीय आधार देता है, जिससे उत्पाद को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जैविक के रूप में विपणन किया जा सकता है। इस परियोजना में 137 एकड़ भूमि पर जैविक खेती शामिल है।

एपीडा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अधीन एक वैधानिक प्राधिकरण है। इसकी स्थापना कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत हुई और इसने 1986 में काम शुरू किया। यह निर्धारित कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देता है। एनपीओपी के मानक जैविक उत्पादन, प्रमाणन संस्थाओं की मान्यता और जैविक उत्पादों के प्रमाणन से जुड़े हैं; भारत में इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन एपीडा करता है।

किसानों के लिए बेहतर मूल्य की संभावना

इस परियोजना से किसानों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। अनुमान के अनुसार, किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में 15 से 22 प्रतिशत अधिक मूल्य मिल सकता है, जबकि निर्माता के लिए मूल्य-प्राप्ति में 17 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। ये आंकड़े संभावित मूल्य-प्राप्ति को दर्शाते हैं, न कि सुनिश्चित आय को। विदेशी बाजार में प्रमाणित उत्पादों की मांग और निर्यात व्यवस्था इस पहल के आगे के परिणामों को प्रभावित करेंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एपीडा की स्थापना कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1985 के तहत हुई; इसने 1986 में काम शुरू किया।
  • एपीडा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अधीन कार्य करता है।
  • पनैया ताड़ का वैज्ञानिक नाम Borassus flabellifer है।
  • इस पहली निर्यात खेप का वजन 1.755 मीट्रिक टन था और इसे बुल्गारिया के वरना भेजा गया।

यह निर्यात तमिलनाडु के पारंपरिक पनैया उत्पाद को विदेशी बाजार से जोड़ता है और जैविक कृषि उत्पादों के लिए नए व्यापार अवसरों की संभावना सामने रखता है।

Originally written on October 16, 2026 and last modified on October 16, 2026.

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