तमिलनाडु का ‘थुली’ अभियान भूजल संरक्षण को देगा नई गति
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 21 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में राज्यव्यापी ‘थुली’ वर्षा जल संचयन जागरूकता अभियान शुरू किया। तमिल भाषा में ‘थुली’ का अर्थ ‘बूंद’ है। अभियान के शुभारंभ पर इसका प्रतीक चिह्न और शुभंकर जारी किया गया। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, मौजूदा प्रणालियों की मरम्मत कराना और भूजल पुनर्भरण को मजबूत करना है।
अभियान का दायरा और उद्देश्य
‘थुली’ अभियान नगर निगमों, नगरपालिकाओं, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों तक लागू होगा। इसके तहत सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, अस्पतालों, आवासीय भवनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में वर्षा जल संचयन प्रणालियों का निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण से यह पता लगाया जाएगा कि किन संरचनाओं की मरम्मत जरूरी है और किन स्थानों पर नई व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
छतों से वर्षा जल एकत्र कर उसे भंडारण स्थल या भूजल पुनर्भरण संरचनाओं तक पहुंचाना इस पहल का प्रमुख हिस्सा है। इसके लिए उपयुक्त स्थानों पर सोख्ता गड्ढे, खाइयां और पुनर्भरण कुएं उपयोगी हो सकते हैं। अभियान में शैक्षणिक संस्थानों, निवासी कल्याण संघों और सामुदायिक समूहों को भी जागरूकता गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
निरीक्षण और प्रशासनिक निगरानी
नगरपालिका प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग इस पहल का समन्वय और निगरानी करेगा। जिला प्रशासन समय-समय पर अभियान के कार्यों की समीक्षा करेगा और भूजल स्तर में होने वाले बदलाव पर नजर रखेगा। अभियान से पहले विभाग ने 16 अक्टूबर 2026 को शासनादेश संख्या 184 जारी किया था।
शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने चेपॉक स्थित तमिलनाडु जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड के मुख्यालय में वर्षा जल संचयन प्रणालियों के नमूनों का निरीक्षण किया। इसके अलावा मरीना बीच पर जागरूकता से जुड़ी एक लघु फिल्म जारी की गई।
तमिलनाडु में वर्षा जल संचयन की पृष्ठभूमि
तमिलनाडु में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की पहल नई नहीं है। राज्य का पिछला वर्षा जल संचयन कार्यक्रम 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के नेतृत्व में शुरू हुआ था। इसके बाद 2003 में राज्य के भवनों के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाएं अनिवार्य कर दी गईं। ‘थुली’ अभियान इसी पूर्ववर्ती व्यवस्था को फिर सक्रिय करने और उसकी पहुंच को मजबूत करने पर केंद्रित है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
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- ‘थुली’ तमिल शब्द है, जिसका अर्थ ‘बूंद’ होता है।
- तमिलनाडु में वर्षा जल संचयन कार्यक्रम 2001 में शुरू हुआ था।
- राज्य में भवनों के लिए वर्षा जल संचयन संरचनाएं 2003 से अनिवार्य हैं।
- ‘थुली’ अभियान का समन्वय एवं निगरानी नगरपालिका प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग करेगा।
‘थुली’ अभियान की सफलता नियमित निरीक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। वर्षा जल को संचित कर जमीन में पहुंचाना भूजल संसाधनों पर दबाव घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।